29 नवंबर 2025 को लंदन का पंचांग

शनिवार, 29 नवंबर 2025, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शनिवार, 29 नवंबर 2025 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (17:45 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (20:52 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:41 पर और सूर्यास्त 15:56 पर है। राहुकाल 09:44 से 10:46 तक है।

दिन और रात
दिन 07:41 – 15:56
रात 07:42 तक
तिथि
नवमी, 17:45 तक
दशमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 20:52 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 17:45 तक
शुक्ल दशमी 15:59, 30 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 19:41, 30 नव॰ तक
योग
वज्रअशुभ 01:42, 30 नव॰ तक
सिद्धि 22:52, 30 नव॰ तक
करण
कौलव 17:45 तक
तैतिल 04:58, 30 नव॰ तक
गर 15:59, 30 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 15:03 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:41
सूर्यास्त
15:56
चंद्रोदय
13:10
चंद्रास्त
00:06
दिनमान
8h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:35 – 06:38
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:05

अशुभ समय

राहुकाल
09:44 – 10:46
यमगंड
12:50 – 13:52
गुलिक काल
07:41 – 08:43

29 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:41 – 08:43टालें
शुभ08:43 – 09:44शुभ
रोग09:44 – 10:46टालें
उद्वेग10:46 – 11:48टालें
चर11:48 – 12:50सामान्य
लाभ12:50 – 13:52शुभ
अमृत13:52 – 14:54शुभ
काल14:54 – 15:56टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ15:56 – 17:54शुभ
उद्वेग17:54 – 19:52टालें
शुभ19:52 – 21:51शुभ
अमृत21:51 – 23:49शुभ
चर23:49 – 01:47सामान्य
रोग01:47 – 03:46टालें
काल03:46 – 05:44टालें
लाभ05:44 – 07:42शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:4108:22दिन
गुरु08:2209:03दिन
मंगल09:0309:44दिन
सूर्य09:4410:26दिन
शुक्र10:2611:07दिन
बुध11:0711:48दिन
चंद्र11:4812:29दिन
शनि12:2913:11दिन
गुरु13:1113:52दिन
मंगल13:5214:33दिन
सूर्य14:3315:14दिन
शुक्र15:1415:56दिन
बुध15:5617:15रात
चंद्र17:1518:33रात
शनि18:3319:52रात
गुरु19:5221:11रात
मंगल21:1122:30रात
सूर्य22:3023:49रात
शुक्र23:4901:08रात
बुध01:0802:27रात
चंद्र02:2703:46रात
शनि03:4605:04रात
गुरु05:0406:23रात
मंगल06:2307:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 दिस॰ 2025पौष अमावस्याअमावस्या
23 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2190° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।