10 अगस्त 2026 को लंदन का पंचांग

सोमवार, 10 अगस्त 2026, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

सोमवार, 10 अगस्त 2026 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (00:24, 11 अग॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (07:57 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 20:32 पर है। राहुकाल 07:29 से 09:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 20:32
रात 05:39 तक
तिथि
त्रयोदशी, 00:24 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पुनर्वसु
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अगस्त 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 00:24, 11 अग॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 21:23, 11 अग॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 05:39, 11 अग॰ तक
योग
वज्रअशुभ 17:57 तक
सिद्धि 14:21, 11 अग॰ तक
करण
गर 13:57 तक
वणिज 00:24, 11 अग॰ तक
विष्टि (भद्रा) 10:52, 11 अग॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 00:13, 11 अग॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
20:32
चंद्रोदय
01:55
चंद्रास्त
19:40
दिनमान
14h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
12:35 – 13:35

अशुभ समय

राहुकाल
07:29 – 09:21
यमगंड
11:13 – 13:05
गुलिक काल
14:57 – 16:49

10 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:38 – 07:29शुभ
काल07:29 – 09:21टालें
शुभ09:21 – 11:13शुभ
रोग11:13 – 13:05टालें
उद्वेग13:05 – 14:57टालें
चर14:57 – 16:49सामान्य
लाभ16:49 – 18:40शुभ
अमृत18:40 – 20:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर20:32 – 21:41सामान्य
रोग21:41 – 22:49टालें
काल22:49 – 23:57टालें
लाभ23:57 – 01:06शुभ
उद्वेग01:06 – 02:14टालें
शुभ02:14 – 03:22शुभ
अमृत03:22 – 04:31शुभ
चर04:31 – 05:39सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3806:52दिन
शनि06:5208:07दिन
गुरु08:0709:21दिन
मंगल09:2110:36दिन
सूर्य10:3611:50दिन
शुक्र11:5013:05दिन
बुध13:0514:19दिन
चंद्र14:1915:34दिन
शनि15:3416:49दिन
गुरु16:4918:03दिन
मंगल18:0319:18दिन
सूर्य19:1820:32दिन
शुक्र20:3221:18रात
बुध21:1822:03रात
चंद्र22:0322:49रात
शनि22:4923:34रात
गुरु23:3400:20रात
मंगल00:2001:06रात
सूर्य01:0601:51रात
शुक्र01:5102:37रात
बुध02:3703:22रात
चंद्र03:2204:08रात
शनि04:0804:54रात
गुरु04:5405:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
31 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2287° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।