16 जुलाई 2027 को लंदन का पंचांग

शुक्रवार, 16 जुलाई 2027, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शुक्रवार, 16 जुलाई 2027 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (12:05 तक), नक्षत्र मूल (03:51, 17 जुल॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:01 पर और सूर्यास्त 21:10 पर है। राहुकाल 11:05 से 13:06 तक है।

दिन और रात
दिन 05:01 – 21:10
रात 05:03 तक
तिथि
त्रयोदशी, 12:05 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल, 03:51 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जुलाई 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 12:05 तक
शुक्ल चतुर्दशी 14:18, 17 जुल॰ तक
नक्षत्र
मूल 03:51, 17 जुल॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 06:48, 18 जुल॰ तक
योग
ब्रह्म 09:05 तक
इंद्र 09:53, 17 जुल॰ तक
करण
तैतिल 12:05 तक
गर 01:10, 17 जुल॰ तक
वणिज 14:18, 17 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:01
सूर्यास्त
21:10
चंद्रोदय
20:16
चंद्रास्त
02:21
दिनमान
16h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
12:33 – 13:38

अशुभ समय

राहुकाल
11:05 – 13:06
यमगंड
17:08 – 19:09
गुलिक काल
07:02 – 09:04

16 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:01 – 07:02सामान्य
लाभ07:02 – 09:04शुभ
अमृत09:04 – 11:05शुभ
काल11:05 – 13:06टालें
शुभ13:06 – 15:07शुभ
रोग15:07 – 17:08टालें
उद्वेग17:08 – 19:09टालें
चर19:09 – 21:10सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग21:10 – 22:09टालें
काल22:09 – 23:08टालें
लाभ23:08 – 00:07शुभ
उद्वेग00:07 – 01:06टालें
शुभ01:06 – 02:05शुभ
अमृत02:05 – 03:04शुभ
चर03:04 – 04:03सामान्य
रोग04:03 – 05:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:0106:22दिन
बुध06:2207:43दिन
चंद्र07:4309:04दिन
शनि09:0410:24दिन
गुरु10:2411:45दिन
मंगल11:4513:06दिन
सूर्य13:0614:26दिन
शुक्र14:2615:47दिन
बुध15:4717:08दिन
चंद्र17:0818:29दिन
शनि18:2919:49दिन
गुरु19:4921:10दिन
मंगल21:1021:49रात
सूर्य21:4922:29रात
शुक्र22:2923:08रात
बुध23:0823:48रात
चंद्र23:4800:27रात
शनि00:2701:06रात
गुरु01:0601:46रात
मंगल01:4602:25रात
सूर्य02:2503:04रात
शुक्र03:0403:44रात
बुध03:4404:23रात
चंद्र04:2305:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2417° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।