11 जुलाई 2029 को लंदन का पंचांग

बुधवार, 11 जुलाई 2029, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

बुधवार, 11 जुलाई 2029 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:51 तक), नक्षत्र आर्द्रा (07:06 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 04:56 पर और सूर्यास्त 21:14 पर है। राहुकाल 13:05 से 15:08 तक है।

दिन और रात
दिन 04:56 – 21:14
रात 04:57 तक
तिथि
अमावस्या, 16:51 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त
अभिजीत

11 जुलाई 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 16:51 तक
शुक्ल प्रतिपदा 16:00, 12 जुल॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 07:12, 12 जुल॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 21:16 तक
हर्षण 19:31, 12 जुल॰ तक
करण
चतुष्पद 05:04 तक
नाग 16:51 तक
किंस्तुघ्न 04:29, 12 जुल॰ तक
बव 16:00, 12 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 01:14, 12 जुल॰ तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
04:56
सूर्यास्त
21:14
चंद्रोदय
04:37
चंद्रास्त
21:02
दिनमान
16h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:25
अभिजीत मुहूर्त
12:33 – 13:38 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:05 – 15:08
यमगंड
06:58 – 09:01
गुलिक काल
11:03 – 13:05

11 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ04:56 – 06:58शुभ
अमृत06:58 – 09:01शुभ
काल09:01 – 11:03टालें
शुभ11:03 – 13:05शुभ
रोग13:05 – 15:08टालें
उद्वेग15:08 – 17:10टालें
चर17:10 – 19:12सामान्य
लाभ19:12 – 21:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग21:14 – 22:12टालें
शुभ22:12 – 23:10शुभ
अमृत23:10 – 00:08शुभ
चर00:08 – 01:06सामान्य
रोग01:06 – 02:04टालें
काल02:04 – 03:02टालें
लाभ03:02 – 03:59शुभ
उद्वेग03:59 – 04:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध04:5606:18दिन
चंद्र06:1807:39दिन
शनि07:3909:01दिन
गुरु09:0110:22दिन
मंगल10:2211:44दिन
सूर्य11:4413:05दिन
शुक्र13:0514:27दिन
बुध14:2715:48दिन
चंद्र15:4817:10दिन
शनि17:1018:31दिन
गुरु18:3119:53दिन
मंगल19:5321:14दिन
सूर्य21:1421:53रात
शुक्र21:5322:31रात
बुध22:3123:10रात
चंद्र23:1023:49रात
शनि23:4900:27रात
गुरु00:2701:06रात
मंगल01:0601:44रात
सूर्य01:4402:23रात
शुक्र02:2303:02रात
बुध03:0203:40रात
चंद्र03:4004:19रात
शनि04:1904:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2695° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।