15 जुलाई 2029 को लंदन का पंचांग

रविवार, 15 जुलाई 2029, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

रविवार, 15 जुलाई 2029 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (11:06 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (03:38, 16 जुल॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:01 पर और सूर्यास्त 21:11 पर है। राहुकाल 19:09 से 21:11 तक है।

दिन और रात
दिन 05:01 – 21:11
रात 05:02 तक
तिथि
चतुर्थी, 11:06 तक
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 03:38 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जुलाई 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 11:06 तक
शुक्ल पंचमी 08:58, 16 जुल॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी 03:38, 16 जुल॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 02:11, 17 जुल॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 12:21 तक
वरीयान 09:34, 16 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:06 तक
बव 22:03 तक
बालव 08:58, 16 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:01
सूर्यास्त
21:11
चंद्रोदय
09:52
चंद्रास्त
22:31
दिनमान
16h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:29
अभिजीत मुहूर्त
12:33 – 13:38

अशुभ समय

राहुकाल
19:09 – 21:11
यमगंड
13:06 – 15:07
गुलिक काल
17:08 – 19:09

15 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:01 – 07:02टालें
चर07:02 – 09:03सामान्य
लाभ09:03 – 11:04शुभ
अमृत11:04 – 13:06शुभ
काल13:06 – 15:07टालें
शुभ15:07 – 17:08शुभ
रोग17:08 – 19:09टालें
उद्वेग19:09 – 21:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ21:11 – 22:10शुभ
अमृत22:10 – 23:08शुभ
चर23:08 – 00:07सामान्य
रोग00:07 – 01:06टालें
काल01:06 – 02:05टालें
लाभ02:05 – 03:04शुभ
उद्वेग03:04 – 04:03टालें
शुभ04:03 – 05:02शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0106:22दिन
शुक्र06:2207:42दिन
बुध07:4209:03दिन
चंद्र09:0310:24दिन
शनि10:2411:45दिन
गुरु11:4513:06दिन
मंगल13:0614:26दिन
सूर्य14:2615:47दिन
शुक्र15:4717:08दिन
बुध17:0818:29दिन
चंद्र18:2919:50दिन
शनि19:5021:11दिन
गुरु21:1121:50रात
मंगल21:5022:29रात
सूर्य22:2923:08रात
शुक्र23:0823:48रात
बुध23:4800:27रात
चंद्र00:2701:06रात
शनि01:0601:46रात
गुरु01:4602:25रात
मंगल02:2503:04रात
सूर्य03:0403:43रात
शुक्र03:4304:23रात
बुध04:2305:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 अग॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अग॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 अग॰ 2029श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2697° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।