19 जनवरी 2025 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 19 जनवरी 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 19 जनवरी 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (07:31 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (17:30 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 16:17 से 17:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 17:38
रात 06:55 तक
तिथि
षष्ठी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 17:30 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 जनवरी 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:31 तक
कृष्ण षष्ठी 09:59, 20 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 20:30, 20 जन॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 01:57, 20 जन॰ तक
सुकर्मा 02:52, 21 जन॰ तक
करण
तैतिल 07:31 तक
गर 20:42 तक
वणिज 09:59, 20 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
22:39
चंद्रास्त
10:11
दिनमान
10h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
16:17 – 17:38
यमगंड
12:17 – 13:37
गुलिक काल
14:57 – 16:17

19 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:55 – 08:16टालें
चर08:16 – 09:36सामान्य
लाभ09:36 – 10:56शुभ
अमृत10:56 – 12:17शुभ
काल12:17 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 14:57शुभ
रोग14:57 – 16:17टालें
उद्वेग16:17 – 17:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:38 – 19:17शुभ
अमृत19:17 – 20:57शुभ
चर20:57 – 22:37सामान्य
रोग22:37 – 00:16टालें
काल00:16 – 01:56टालें
लाभ01:56 – 03:36शुभ
उद्वेग03:36 – 05:16टालें
शुभ05:16 – 06:55शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:5507:49दिन
शुक्र07:4908:43दिन
बुध08:4309:36दिन
चंद्र09:3610:30दिन
शनि10:3011:23दिन
गुरु11:2312:17दिन
मंगल12:1713:10दिन
सूर्य13:1014:04दिन
शुक्र14:0414:57दिन
बुध14:5715:51दिन
चंद्र15:5116:44दिन
शनि16:4417:38दिन
गुरु17:3818:44रात
मंगल18:4419:51रात
सूर्य19:5120:57रात
शुक्र20:5722:03रात
बुध22:0323:10रात
चंद्र23:1000:16रात
शनि00:1601:23रात
गुरु01:2302:29रात
मंगल02:2903:36रात
सूर्य03:3604:42रात
शुक्र04:4205:49रात
बुध05:4906:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2070° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।