15 फ़रवरी 2025 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 15 फ़रवरी 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 फ़रवरी 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (23:52 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (01:39, 16 फ़र॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:58 पर है। राहुकाल 09:31 से 10:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:58
रात 06:41 तक
तिथि
तृतीया, 23:52 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 01:39 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 23:52 तक
कृष्ण चतुर्थी 02:16, 17 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 01:39, 16 फ़र॰ तक
हस्त 04:31, 17 फ़र॰ तक
योग
सुकर्मा 07:32 तक
धृति 08:05, 16 फ़र॰ तक
करण
वणिज 10:49 तक
विष्टि (भद्रा) 23:52 तक
बव 13:02, 16 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:58
चंद्रोदय
20:30
चंद्रास्त
08:11
दिनमान
11h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
09:31 – 10:55
यमगंड
13:44 – 15:09
गुलिक काल
06:42 – 08:07

15 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:42 – 08:07टालें
शुभ08:07 – 09:31शुभ
रोग09:31 – 10:55टालें
उद्वेग10:55 – 12:20टालें
चर12:20 – 13:44सामान्य
लाभ13:44 – 15:09शुभ
अमृत15:09 – 16:33शुभ
काल16:33 – 17:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:58 – 19:33शुभ
उद्वेग19:33 – 21:09टालें
शुभ21:09 – 22:44शुभ
अमृत22:44 – 00:20शुभ
चर00:20 – 01:55सामान्य
रोग01:55 – 03:30टालें
काल03:30 – 05:06टालें
लाभ05:06 – 06:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4207:38दिन
गुरु07:3808:35दिन
मंगल08:3509:31दिन
सूर्य09:3110:27दिन
शुक्र10:2711:24दिन
बुध11:2412:20दिन
चंद्र12:2013:16दिन
शनि13:1614:13दिन
गुरु14:1315:09दिन
मंगल15:0916:05दिन
सूर्य16:0517:02दिन
शुक्र17:0217:58दिन
बुध17:5819:01रात
चंद्र19:0120:05रात
शनि20:0521:09रात
गुरु21:0922:12रात
मंगल22:1223:16रात
सूर्य23:1600:20रात
शुक्र00:2001:23रात
बुध01:2302:27रात
चंद्र02:2703:30रात
शनि03:3004:34रात
गुरु04:3405:38रात
मंगल05:3806:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2080° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।