31 मार्च 2025 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 31 मार्च 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 31 मार्च 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (09:11 तक), नक्षत्र अश्विनी (13:45 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 07:31 से 09:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:22
रात 05:57 तक
तिथि
तृतीया, 05:42 तक
नक्षत्र
अश्विनी, 13:45 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 मार्च 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:11 तक
शुक्ल तृतीया 05:42, 1 अप्रैल तक
शुक्ल चतुर्थी 02:32, 2 अप्रैल तक
नक्षत्र
भरणी 11:06, 1 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 13:45 तक
विष्कंभअशुभ 09:48, 1 अप्रैल तक
करण
कौलव 09:11 तक
तैतिल 19:25 तक
गर 05:42, 1 अप्रैल तक
वणिज 16:05, 1 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
06:59
चंद्रास्त
20:41
दिनमान
12h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
07:31 – 09:04
यमगंड
10:37 – 12:10
गुलिक काल
13:43 – 15:16

31 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:58 – 07:31शुभ
काल07:31 – 09:04टालें
शुभ09:04 – 10:37शुभ
रोग10:37 – 12:10टालें
उद्वेग12:10 – 13:43टालें
चर13:43 – 15:16सामान्य
लाभ15:16 – 16:49शुभ
अमृत16:49 – 18:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:22 – 19:49सामान्य
रोग19:49 – 21:16टालें
काल21:16 – 22:43टालें
लाभ22:43 – 00:10शुभ
उद्वेग00:10 – 01:36टालें
शुभ01:36 – 03:03शुभ
अमृत03:03 – 04:30शुभ
चर04:30 – 05:57सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5807:00दिन
शनि07:0008:02दिन
गुरु08:0209:04दिन
मंगल09:0410:06दिन
सूर्य10:0611:08दिन
शुक्र11:0812:10दिन
बुध12:1013:12दिन
चंद्र13:1214:14दिन
शनि14:1415:16दिन
गुरु15:1616:18दिन
मंगल16:1817:20दिन
सूर्य17:2018:22दिन
शुक्र18:2219:20रात
बुध19:2020:18रात
चंद्र20:1821:16रात
शनि21:1622:14रात
गुरु22:1423:12रात
मंगल23:1200:10रात
सूर्य00:1001:07रात
शुक्र01:0702:05रात
बुध02:0503:03रात
चंद्र03:0304:01रात
शनि04:0104:59रात
गुरु04:5905:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अप्रैल 2025वैशाख अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2097° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।