3 मई 2025 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 3 मई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 3 मई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (07:52 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (12:34 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 08:44 से 10:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 18:39
रात 05:25 तक
तिथि
सप्तमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 12:34 तक
पुष्य
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मई 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 07:52 तक
शुक्ल सप्तमी 07:19, 4 मई तक
नक्षत्र
पुष्य 12:53, 4 मई तक
योग
शूलअशुभ 01:40, 4 मई तक
गंडअशुभ 00:41, 5 मई तक
करण
तैतिल 07:52 तक
गर 19:29 तक
वणिज 07:19, 4 मई तक
चंद्र राशि
मिथुन 06:37 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
10:23
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:43
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
08:44 – 10:24
यमगंड
13:42 – 15:21
गुलिक काल
05:26 – 07:05

3 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:26 – 07:05टालें
शुभ07:05 – 08:44शुभ
रोग08:44 – 10:24टालें
उद्वेग10:24 – 12:03टालें
चर12:03 – 13:42सामान्य
लाभ13:42 – 15:21शुभ
अमृत15:21 – 17:00शुभ
काल17:00 – 18:39टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:39 – 20:00शुभ
उद्वेग20:00 – 21:21टालें
शुभ21:21 – 22:42शुभ
अमृत22:42 – 00:02शुभ
चर00:02 – 01:23सामान्य
रोग01:23 – 02:44टालें
काल02:44 – 04:05टालें
लाभ04:05 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2606:32दिन
गुरु06:3207:38दिन
मंगल07:3808:44दिन
सूर्य08:4409:51दिन
शुक्र09:5110:57दिन
बुध10:5712:03दिन
चंद्र12:0313:09दिन
शनि13:0914:15दिन
गुरु14:1515:21दिन
मंगल15:2116:27दिन
सूर्य16:2717:33दिन
शुक्र17:3318:39दिन
बुध18:3919:33रात
चंद्र19:3320:27रात
शनि20:2721:21रात
गुरु21:2122:15रात
मंगल22:1523:09रात
सूर्य23:0900:02रात
शुक्र00:0200:56रात
बुध00:5601:50रात
चंद्र01:5002:44रात
शनि02:4403:38रात
गुरु03:3804:31रात
मंगल04:3105:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 मई 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 मई 2025वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
15 मई 2025वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2110° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।