26 मई 2025 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 26 मई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 26 मई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (12:12 तक), नक्षत्र भरणी (08:23 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 18:52 पर है। राहुकाल 06:56 से 08:38 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 18:52
रात 05:13 तक
तिथि
चतुर्दशी, 12:12 तक
अमावस्या
नक्षत्र
भरणी, 08:23 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 मई 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 12:12 तक
अमावस्या 08:32, 27 मई तक
नक्षत्र
भरणी 08:23 तक
कृत्तिका 05:32, 27 मई तक
योग
शोभन 07:01 तक
अतिगंडअशुभ 02:54, 27 मई तक
सुकर्मा 22:54, 27 मई तक
करण
शकुनि 12:12 तक
चतुष्पद 22:21 तक
नाग 08:32, 27 मई तक
चंद्र राशि
मेष 13:40 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
18:52
चंद्रोदय
04:04
चंद्रास्त
18:14
दिनमान
13h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
06:56 – 08:38
यमगंड
10:21 – 12:03
गुलिक काल
13:45 – 15:28

26 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:14 – 06:56शुभ
काल06:56 – 08:38टालें
शुभ08:38 – 10:21शुभ
रोग10:21 – 12:03टालें
उद्वेग12:03 – 13:45टालें
चर13:45 – 15:28सामान्य
लाभ15:28 – 17:10शुभ
अमृत17:10 – 18:52शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:52 – 20:10सामान्य
रोग20:10 – 21:27टालें
काल21:27 – 22:45टालें
लाभ22:45 – 00:03शुभ
उद्वेग00:03 – 01:20टालें
शुभ01:20 – 02:38शुभ
अमृत02:38 – 03:56शुभ
चर03:56 – 05:13सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1406:22दिन
शनि06:2207:30दिन
गुरु07:3008:38दिन
मंगल08:3809:46दिन
सूर्य09:4610:55दिन
शुक्र10:5512:03दिन
बुध12:0313:11दिन
चंद्र13:1114:19दिन
शनि14:1915:28दिन
गुरु15:2816:36दिन
मंगल16:3617:44दिन
सूर्य17:4418:52दिन
शुक्र18:5219:44रात
बुध19:4420:36रात
चंद्र20:3621:27रात
शनि21:2722:19रात
गुरु22:1923:11रात
मंगल23:1100:03रात
सूर्य00:0300:54रात
शुक्र00:5401:46रात
बुध01:4602:38रात
चंद्र02:3803:30रात
शनि03:3004:21रात
गुरु04:2105:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जून 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 जून 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जून 2025ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
15 जून 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2025मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जून 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जून 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2118° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।