14 जून 2025 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 14 जून 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 14 जून 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (15:47 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (00:22, 15 जून तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 08:39 से 10:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 19:01
रात 05:12 तक
तिथि
तृतीया, 15:47 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 00:22 तक
श्रवण
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जून 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 15:47 तक
कृष्ण चतुर्थी 15:51, 15 जून तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 00:22, 15 जून तक
श्रवण 00:59, 16 जून तक
योग
ब्रह्म 13:12 तक
इंद्र 12:19, 15 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:47 तक
बव 03:52, 15 जून तक
बालव 15:51, 15 जून तक
चंद्र राशि
धनु 05:38 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
21:48
चंद्रास्त
07:31
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
08:39 – 10:22
यमगंड
13:50 – 15:33
गुलिक काल
05:12 – 06:55

14 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:12 – 06:55टालें
शुभ06:55 – 08:39शुभ
रोग08:39 – 10:22टालें
उद्वेग10:22 – 12:06टालें
चर12:06 – 13:50सामान्य
लाभ13:50 – 15:33शुभ
अमृत15:33 – 17:17शुभ
काल17:17 – 19:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:01 – 20:17शुभ
उद्वेग20:17 – 21:33टालें
शुभ21:33 – 22:50शुभ
अमृत22:50 – 00:06शुभ
चर00:06 – 01:22सामान्य
रोग01:22 – 02:39टालें
काल02:39 – 03:55टालें
लाभ03:55 – 05:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1206:21दिन
गुरु06:2107:30दिन
मंगल07:3008:39दिन
सूर्य08:3909:48दिन
शुक्र09:4810:57दिन
बुध10:5712:06दिन
चंद्र12:0613:15दिन
शनि13:1514:24दिन
गुरु14:2415:33दिन
मंगल15:3316:42दिन
सूर्य16:4217:51दिन
शुक्र17:5119:01दिन
बुध19:0119:51रात
चंद्र19:5120:42रात
शनि20:4221:33रात
गुरु21:3322:24रात
मंगल22:2423:15रात
सूर्य23:1500:06रात
शुक्र00:0600:57रात
बुध00:5701:48रात
चंद्र01:4802:39रात
शनि02:3903:30रात
गुरु03:3004:21रात
मंगल04:2105:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जून 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2025मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
19 जून 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जून 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 जून 2025आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
29 जून 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जुल॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2126° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।