17 जून 2025 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 17 जून 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 17 जून 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (14:47 तक), नक्षत्र शतभिषा (01:01, 18 जून तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 15:34 से 17:18 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 19:01
रात 05:12 तक
तिथि
षष्ठी, 14:47 तक
सप्तमी
नक्षत्र
शतभिषा, 01:01 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जून 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 14:47 तक
कृष्ण सप्तमी 13:35, 18 जून तक
नक्षत्र
शतभिषा 01:01, 18 जून तक
पूर्वा भाद्रपद 00:23, 19 जून तक
योग
विष्कंभअशुभ 09:34 तक
प्रीति 07:40, 18 जून तक
करण
वणिज 14:47 तक
विष्टि (भद्रा) 02:14, 18 जून तक
बव 13:35, 18 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
23:36
चंद्रास्त
10:34
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
15:34 – 17:18
यमगंड
08:39 – 10:23
गुलिक काल
12:07 – 13:50

17 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:12 – 06:56टालें
उद्वेग06:56 – 08:39टालें
चर08:39 – 10:23सामान्य
लाभ10:23 – 12:07शुभ
अमृत12:07 – 13:50शुभ
काल13:50 – 15:34टालें
शुभ15:34 – 17:18शुभ
रोग17:18 – 19:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:01 – 20:18टालें
लाभ20:18 – 21:34शुभ
उद्वेग21:34 – 22:50टालें
शुभ22:50 – 00:07शुभ
अमृत00:07 – 01:23शुभ
चर01:23 – 02:39सामान्य
रोग02:39 – 03:56टालें
काल03:56 – 05:12टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:1206:21दिन
सूर्य06:2107:30दिन
शुक्र07:3008:39दिन
बुध08:3909:48दिन
चंद्र09:4810:58दिन
शनि10:5812:07दिन
गुरु12:0713:16दिन
मंगल13:1614:25दिन
सूर्य14:2515:34दिन
शुक्र15:3416:43दिन
बुध16:4317:52दिन
चंद्र17:5219:01दिन
शनि19:0119:52रात
गुरु19:5220:43रात
मंगल20:4321:34रात
सूर्य21:3422:25रात
शुक्र22:2523:16रात
बुध23:1600:07रात
चंद्र00:0700:58रात
शनि00:5801:49रात
गुरु01:4902:39रात
मंगल02:3903:30रात
सूर्य03:3004:21रात
शुक्र04:2105:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 जून 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जून 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जून 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 जून 2025आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
29 जून 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जुल॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2127° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।