27 जून 2025 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 27 जून 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 27 जून 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (11:19 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (07:22 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:14 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 10:25 से 12:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:14 – 19:03
रात 05:15 तक
तिथि
द्वितीया, 11:19 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जून 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 11:19 तक
शुक्ल तृतीया 09:54, 28 जून तक
नक्षत्र
पुष्य 06:35, 28 जून तक
योग
व्याघातअशुभ 21:10 तक
हर्षण 19:15, 28 जून तक
करण
कौलव 11:19 तक
तैतिल 22:31 तक
गर 09:54, 28 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:14
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
06:52
चंद्रास्त
21:04
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
10:25 – 12:09
यमगंड
15:36 – 17:20
गुलिक काल
06:58 – 08:41

27 जून 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:14 – 06:58सामान्य
लाभ06:58 – 08:41शुभ
अमृत08:41 – 10:25शुभ
काल10:25 – 12:09टालें
शुभ12:09 – 13:52शुभ
रोग13:52 – 15:36टालें
उद्वेग15:36 – 17:20टालें
चर17:20 – 19:03सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:03 – 20:20टालें
काल20:20 – 21:36टालें
लाभ21:36 – 22:53शुभ
उद्वेग22:53 – 00:09टालें
शुभ00:09 – 01:25शुभ
अमृत01:25 – 02:42शुभ
चर02:42 – 03:58सामान्य
रोग03:58 – 05:15टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1406:23दिन
बुध06:2307:32दिन
चंद्र07:3208:41दिन
शनि08:4109:51दिन
गुरु09:5111:00दिन
मंगल11:0012:09दिन
सूर्य12:0913:18दिन
शुक्र13:1814:27दिन
बुध14:2715:36दिन
चंद्र15:3616:45दिन
शनि16:4517:54दिन
गुरु17:5419:03दिन
मंगल19:0319:54रात
सूर्य19:5420:45रात
शुक्र20:4521:36रात
बुध21:3622:27रात
चंद्र22:2723:18रात
शनि23:1800:09रात
गुरु00:0901:00रात
मंगल01:0001:51रात
सूर्य01:5102:42रात
शुक्र02:4203:33रात
बुध03:3304:24रात
चंद्र04:2405:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जून 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जुल॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2131° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।