18 जुलाई 2025 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (17:02 तक), नक्षत्र अश्विनी (02:14, 19 जुल॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 10:30 से 12:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:01
रात 05:24 तक
तिथि
अष्टमी, 17:02 तक
नवमी
नक्षत्र
अश्विनी, 02:14 तक
भरणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 जुलाई 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 17:02 तक
कृष्ण नवमी 14:42, 19 जुल॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 02:14, 19 जुल॰ तक
भरणी 00:37, 20 जुल॰ तक
योग
सुकर्मा 06:48 तक
धृति 03:56, 19 जुल॰ तक
शूलअशुभ 00:55, 20 जुल॰ तक
करण
बालव 06:07 तक
कौलव 17:02 तक
तैतिल 03:53, 19 जुल॰ तक
गर 14:42, 19 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
23:54
चंद्रास्त
12:34
दिनमान
13h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:30 – 12:12
यमगंड
15:36 – 17:18
गुलिक काल
07:05 – 08:47

18 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:23 – 07:05सामान्य
लाभ07:05 – 08:47शुभ
अमृत08:47 – 10:30शुभ
काल10:30 – 12:12टालें
शुभ12:12 – 13:54शुभ
रोग13:54 – 15:36टालें
उद्वेग15:36 – 17:18टालें
चर17:18 – 19:01सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:01 – 20:19टालें
काल20:19 – 21:36टालें
लाभ21:36 – 22:54शुभ
उद्वेग22:54 – 00:12टालें
शुभ00:12 – 01:30शुभ
अमृत01:30 – 02:48शुभ
चर02:48 – 04:06सामान्य
रोग04:06 – 05:24टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2306:31दिन
बुध06:3107:39दिन
चंद्र07:3908:47दिन
शनि08:4709:56दिन
गुरु09:5611:04दिन
मंगल11:0412:12दिन
सूर्य12:1213:20दिन
शुक्र13:2014:28दिन
बुध14:2815:36दिन
चंद्र15:3616:44दिन
शनि16:4417:53दिन
गुरु17:5319:01दिन
मंगल19:0119:53रात
सूर्य19:5320:44रात
शुक्र20:4421:36रात
बुध21:3622:28रात
चंद्र22:2823:20रात
शनि23:2000:12रात
गुरु00:1201:04रात
मंगल01:0401:56रात
सूर्य01:5602:48रात
शुक्र02:4803:40रात
बुध03:4004:32रात
चंद्र04:3205:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2139° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।