27 जुलाई 2025 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 27 जुलाई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 27 जुलाई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (22:42 तक), नक्षत्र मघा (16:23 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:28 पर और सूर्यास्त 18:57 पर है। राहुकाल 17:15 से 18:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:28 – 18:57
रात 05:28 तक
तिथि
तृतीया, 22:42 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
मघा, 16:23 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जुलाई 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 22:42 तक
शुक्ल चतुर्थी 23:24, 28 जुल॰ तक
नक्षत्र
मघा 16:23 तक
पूर्वा फाल्गुनी 17:35, 28 जुल॰ तक
योग
वरीयान 03:13, 28 जुल॰ तक
परिघअशुभ 02:53, 29 जुल॰ तक
करण
तैतिल 10:37 तक
गर 22:42 तक
वणिज 10:58, 28 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:28
सूर्यास्त
18:57
चंद्रोदय
07:43
चंद्रास्त
20:48
दिनमान
13h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
17:15 – 18:57
यमगंड
12:12 – 13:53
गुलिक काल
15:34 – 17:15

27 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:28 – 07:09टालें
चर07:09 – 08:50सामान्य
लाभ08:50 – 10:31शुभ
अमृत10:31 – 12:12शुभ
काल12:12 – 13:53टालें
शुभ13:53 – 15:34शुभ
रोग15:34 – 17:15टालें
उद्वेग17:15 – 18:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:57 – 20:16शुभ
अमृत20:16 – 21:34शुभ
चर21:34 – 22:53सामान्य
रोग22:53 – 00:12टालें
काल00:12 – 01:31टालें
लाभ01:31 – 02:50शुभ
उद्वेग02:50 – 04:09टालें
शुभ04:09 – 05:28शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2806:35दिन
शुक्र06:3507:42दिन
बुध07:4208:50दिन
चंद्र08:5009:57दिन
शनि09:5711:05दिन
गुरु11:0512:12दिन
मंगल12:1213:20दिन
सूर्य13:2014:27दिन
शुक्र14:2715:34दिन
बुध15:3416:42दिन
चंद्र16:4217:49दिन
शनि17:4918:57दिन
गुरु18:5719:49रात
मंगल19:4920:42रात
सूर्य20:4221:34रात
शुक्र21:3422:27रात
बुध22:2723:20रात
चंद्र23:2000:12रात
शनि00:1201:05रात
गुरु01:0501:58रात
मंगल01:5802:50रात
सूर्य02:5003:43रात
शुक्र03:4304:36रात
बुध04:3605:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2142° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।