11 अगस्त 2025 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 11 अगस्त 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 11 अगस्त 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (10:34 तक), नक्षत्र शतभिषा (13:00 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 07:14 से 08:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 18:46
रात 05:36 तक
तिथि
द्वितीया, 10:34 तक
तृतीया
नक्षत्र
शतभिषा, 13:00 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अगस्त 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 10:34 तक
कृष्ण तृतीया 08:41, 12 अग॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:00 तक
पूर्वा भाद्रपद 11:52, 12 अग॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 21:33 तक
सुकर्मा 18:53, 12 अग॰ तक
करण
गर 10:34 तक
वणिज 21:39 तक
विष्टि (भद्रा) 08:41, 12 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
20:12
चंद्रास्त
07:20
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
07:14 – 08:53
यमगंड
10:32 – 12:11
गुलिक काल
13:50 – 15:28

11 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:35 – 07:14शुभ
काल07:14 – 08:53टालें
शुभ08:53 – 10:32शुभ
रोग10:32 – 12:11टालें
उद्वेग12:11 – 13:50टालें
चर13:50 – 15:28सामान्य
लाभ15:28 – 17:07शुभ
अमृत17:07 – 18:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:46 – 20:07सामान्य
रोग20:07 – 21:29टालें
काल21:29 – 22:50टालें
लाभ22:50 – 00:11शुभ
उद्वेग00:11 – 01:32टालें
शुभ01:32 – 02:53शुभ
अमृत02:53 – 04:15शुभ
चर04:15 – 05:36सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3506:41दिन
शनि06:4107:47दिन
गुरु07:4708:53दिन
मंगल08:5309:59दिन
सूर्य09:5911:05दिन
शुक्र11:0512:11दिन
बुध12:1113:17दिन
चंद्र13:1714:23दिन
शनि14:2315:28दिन
गुरु15:2816:34दिन
मंगल16:3417:40दिन
सूर्य17:4018:46दिन
शुक्र18:4619:40रात
बुध19:4020:34रात
चंद्र20:3421:29रात
शनि21:2922:23रात
गुरु22:2323:17रात
मंगल23:1700:11रात
सूर्य00:1101:05रात
शुक्र01:0501:59रात
बुध01:5902:53रात
चंद्र02:5303:48रात
शनि03:4804:42रात
गुरु04:4205:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2148° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।