10 नवंबर 2025 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 10 नवंबर 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 10 नवंबर 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (00:08, 11 नव॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (18:48 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 17:17 पर है। राहुकाल 07:44 से 09:06 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 17:17
रात 06:22 तक
तिथि
षष्ठी, 00:08 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 18:48 तक
पुष्य
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 नवंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 00:08, 11 नव॰ तक
कृष्ण सप्तमी 23:09, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 18:18, 11 नव॰ तक
योग
साध्य 12:05 तक
शुभ 09:44, 11 नव॰ तक
करण
गर 12:56 तक
वणिज 00:08, 11 नव॰ तक
विष्टि (भद्रा) 11:32, 11 नव॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 13:03 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
17:17
चंद्रोदय
22:04
चंद्रास्त
11:26
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:29
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:11

अशुभ समय

राहुकाल
07:44 – 09:06
यमगंड
10:28 – 11:49
गुलिक काल
13:11 – 14:33

10 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:22 – 07:44शुभ
काल07:44 – 09:06टालें
शुभ09:06 – 10:28शुभ
रोग10:28 – 11:49टालें
उद्वेग11:49 – 13:11टालें
चर13:11 – 14:33सामान्य
लाभ14:33 – 15:55शुभ
अमृत15:55 – 17:17शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:17 – 18:55सामान्य
रोग18:55 – 20:34टालें
काल20:34 – 22:12टालें
लाभ22:12 – 23:50शुभ
उद्वेग23:50 – 01:28टालें
शुभ01:28 – 03:06शुभ
अमृत03:06 – 04:44शुभ
चर04:44 – 06:22सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2207:16दिन
शनि07:1608:11दिन
गुरु08:1109:06दिन
मंगल09:0610:00दिन
सूर्य10:0010:55दिन
शुक्र10:5511:49दिन
बुध11:4912:44दिन
चंद्र12:4413:39दिन
शनि13:3914:33दिन
गुरु14:3315:28दिन
मंगल15:2816:23दिन
सूर्य16:2317:17दिन
शुक्र17:1718:23रात
बुध18:2319:28रात
चंद्र19:2820:34रात
शनि20:3421:39रात
गुरु21:3922:44रात
मंगल22:4423:50रात
सूर्य23:5000:55रात
शुक्र00:5502:01रात
बुध02:0103:06रात
चंद्र03:0604:12रात
शनि04:1205:17रात
गुरु05:1706:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2183° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।