12 अप्रैल 2026 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 12 अप्रैल 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 12 अप्रैल 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (01:17, 13 अप्रैल तक), नक्षत्र श्रवण (15:14 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 16:53 से 18:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 18:28
रात 05:44 तक
तिथि
दशमी, 01:17 तक
एकादशी
नक्षत्र
श्रवण, 15:14 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अप्रैल 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 01:17, 13 अप्रैल तक
कृष्ण एकादशी 01:09, 14 अप्रैल तक
नक्षत्र
श्रवण 15:14 तक
धनिष्ठा 16:03, 13 अप्रैल तक
योग
साध्य 18:15 तक
शुभ 17:16, 13 अप्रैल तक
करण
वणिज 13:03 तक
विष्टि (भद्रा) 01:17, 13 अप्रैल तक
बव 13:19, 13 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मकर 03:44, 13 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
02:24
चंद्रास्त
13:25
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
16:53 – 18:28
यमगंड
12:07 – 13:42
गुलिक काल
15:17 – 16:53

12 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:45 – 07:21टालें
चर07:21 – 08:56सामान्य
लाभ08:56 – 10:31शुभ
अमृत10:31 – 12:07शुभ
काल12:07 – 13:42टालें
शुभ13:42 – 15:17शुभ
रोग15:17 – 16:53टालें
उद्वेग16:53 – 18:28टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:28 – 19:53शुभ
अमृत19:53 – 21:17शुभ
चर21:17 – 22:42सामान्य
रोग22:42 – 00:06टालें
काल00:06 – 01:31टालें
लाभ01:31 – 02:55शुभ
उद्वेग02:55 – 04:20टालें
शुभ04:20 – 05:44शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4506:49दिन
शुक्र06:4907:52दिन
बुध07:5208:56दिन
चंद्र08:5610:00दिन
शनि10:0011:03दिन
गुरु11:0312:07दिन
मंगल12:0713:10दिन
सूर्य13:1014:14दिन
शुक्र14:1415:17दिन
बुध15:1716:21दिन
चंद्र16:2117:25दिन
शनि17:2518:28दिन
गुरु18:2819:25रात
मंगल19:2520:21रात
सूर्य20:2121:17रात
शुक्र21:1722:14रात
बुध22:1423:10रात
चंद्र23:1000:06रात
शनि00:0601:03रात
गुरु01:0301:59रात
मंगल01:5902:55रात
सूर्य02:5503:52रात
शुक्र03:5204:48रात
बुध04:4805:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2241° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।