3 जुलाई 2026 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 3 जुलाई 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (11:20 तक), नक्षत्र श्रवण (11:46 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:16 पर और सूर्यास्त 19:04 पर है। राहुकाल 10:26 से 12:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:16 – 19:04
रात 05:17 तक
तिथि
तृतीया, 11:20 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
श्रवण, 11:46 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जुलाई 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 11:20 तक
कृष्ण चतुर्थी 12:40, 4 जुल॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 11:46 तक
धनिष्ठा 13:44, 4 जुल॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 17:00 तक
प्रीति 17:01, 4 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:20 तक
बव 00:03, 4 जुल॰ तक
बालव 12:40, 4 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मकर 00:48, 4 जुल॰ तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:16
सूर्यास्त
19:04
चंद्रोदय
21:30
चंद्रास्त
07:58
दिनमान
13h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
10:26 – 12:10
यमगंड
15:37 – 17:20
गुलिक काल
07:00 – 08:43

3 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:16 – 07:00सामान्य
लाभ07:00 – 08:43शुभ
अमृत08:43 – 10:26शुभ
काल10:26 – 12:10टालें
शुभ12:10 – 13:53शुभ
रोग13:53 – 15:37टालें
उद्वेग15:37 – 17:20टालें
चर17:20 – 19:04सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:04 – 20:20टालें
काल20:20 – 21:37टालें
लाभ21:37 – 22:53शुभ
उद्वेग22:53 – 00:10टालें
शुभ00:10 – 01:27शुभ
अमृत01:27 – 02:43शुभ
चर02:43 – 04:00सामान्य
रोग04:00 – 05:17टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1606:25दिन
बुध06:2507:34दिन
चंद्र07:3408:43दिन
शनि08:4309:52दिन
गुरु09:5211:01दिन
मंगल11:0112:10दिन
सूर्य12:1013:19दिन
शुक्र13:1914:28दिन
बुध14:2815:37दिन
चंद्र15:3716:46दिन
शनि16:4617:55दिन
गुरु17:5519:04दिन
मंगल19:0419:55रात
सूर्य19:5520:46रात
शुक्र20:4621:37रात
बुध21:3722:28रात
चंद्र22:2823:19रात
शनि23:1900:10रात
गुरु00:1001:01रात
मंगल01:0101:52रात
सूर्य01:5202:43रात
शुक्र02:4303:34रात
बुध03:3404:25रात
चंद्र04:2505:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जुल॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2273° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।