30 जुलाई 2026 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 30 जुलाई 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (21:30 तक), नक्षत्र श्रवण (17:43 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 13:53 से 15:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 18:55
रात 05:30 तक
तिथि
प्रतिपदा, 21:30 तक
द्वितीया
नक्षत्र
श्रवण, 17:43 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जुलाई 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 21:30 तक
कृष्ण द्वितीया 22:32, 31 जुल॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 17:43 तक
धनिष्ठा 19:27, 31 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 00:05, 31 जुल॰ तक
सौभाग्य 23:54, 31 जुल॰ तक
करण
बालव 08:51 तक
कौलव 21:30 तक
तैतिल 10:04, 31 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
19:32
चंद्रास्त
05:52
दिनमान
13h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:53 – 15:33
यमगंड
05:29 – 07:10
गुलिक काल
08:51 – 10:31

30 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:29 – 07:10शुभ
रोग07:10 – 08:51टालें
उद्वेग08:51 – 10:31टालें
चर10:31 – 12:12सामान्य
लाभ12:12 – 13:53शुभ
अमृत13:53 – 15:33शुभ
काल15:33 – 17:14टालें
शुभ17:14 – 18:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:55 – 20:14शुभ
चर20:14 – 21:34सामान्य
रोग21:34 – 22:53टालें
काल22:53 – 00:12टालें
लाभ00:12 – 01:32शुभ
उद्वेग01:32 – 02:51टालें
शुभ02:51 – 04:10शुभ
अमृत04:10 – 05:30शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2906:36दिन
मंगल06:3607:43दिन
सूर्य07:4308:51दिन
शुक्र08:5109:58दिन
बुध09:5811:05दिन
चंद्र11:0512:12दिन
शनि12:1213:19दिन
गुरु13:1914:26दिन
मंगल14:2615:33दिन
सूर्य15:3316:41दिन
शुक्र16:4117:48दिन
बुध17:4818:55दिन
चंद्र18:5519:48रात
शनि19:4820:41रात
गुरु20:4121:34रात
मंगल21:3422:27रात
सूर्य22:2723:19रात
शुक्र23:1900:12रात
बुध00:1201:05रात
चंद्र01:0501:58रात
शनि01:5802:51रात
गुरु02:5103:44रात
मंगल03:4404:37रात
सूर्य04:3705:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या
16 अग॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अग॰ 2026सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
23 अग॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अग॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अग॰ 2026श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2283° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।