20 अक्टूबर 2026 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (12:50 तक), नक्षत्र श्रवण (18:02 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 17:33 पर है। राहुकाल 14:42 से 16:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 17:33
रात 06:08 तक
तिथि
नवमी, 12:50 तक
दशमी
नक्षत्र
श्रवण, 18:02 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल नवमी 12:50 तक
शुक्ल दशमी 14:12, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:02 तक
धनिष्ठा 19:48, 21 अक्टू॰ तक
योग
शूलअशुभ 00:50, 21 अक्टू॰ तक
गंडअशुभ 00:33, 22 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 12:50 तक
तैतिल 01:36, 21 अक्टू॰ तक
गर 14:12, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
17:33
चंद्रोदय
14:00
चंद्रास्त
00:16
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
14:42 – 16:07
यमगंड
08:59 – 10:25
गुलिक काल
11:50 – 13:16

20 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:08 – 07:33टालें
उद्वेग07:33 – 08:59टालें
चर08:59 – 10:25सामान्य
लाभ10:25 – 11:50शुभ
अमृत11:50 – 13:16शुभ
काल13:16 – 14:42टालें
शुभ14:42 – 16:07शुभ
रोग16:07 – 17:33टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:33 – 19:07टालें
लाभ19:07 – 20:42शुभ
उद्वेग20:42 – 22:16टालें
शुभ22:16 – 23:51शुभ
अमृत23:51 – 01:25शुभ
चर01:25 – 03:00सामान्य
रोग03:00 – 04:34टालें
काल04:34 – 06:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0807:05दिन
सूर्य07:0508:02दिन
शुक्र08:0208:59दिन
बुध08:5909:56दिन
चंद्र09:5610:53दिन
शनि10:5311:50दिन
गुरु11:5012:47दिन
मंगल12:4713:45दिन
सूर्य13:4514:42दिन
शुक्र14:4215:39दिन
बुध15:3916:36दिन
चंद्र16:3617:33दिन
शनि17:3318:36रात
गुरु18:3619:39रात
मंगल19:3920:42रात
सूर्य20:4221:45रात
शुक्र21:4522:48रात
बुध22:4823:51रात
चंद्र23:5100:54रात
शनि00:5401:57रात
गुरु01:5703:00रात
मंगल03:0004:03रात
सूर्य04:0305:05रात
शुक्र05:0506:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2314° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।