29 मई 2027 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 29 मई 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 29 मई 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (08:20 तक), नक्षत्र शतभिषा (09:42 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:13 पर और सूर्यास्त 18:54 पर है। राहुकाल 08:38 से 10:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:13 – 18:54
रात 05:13 तक
तिथि
अष्टमी, 08:20 तक
नवमी
नक्षत्र
शतभिषा, 09:42 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 मई 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 08:20 तक
कृष्ण नवमी 09:35, 30 मई तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:42 तक
योग
विष्कंभअशुभ 03:43, 30 मई तक
प्रीति 03:15, 31 मई तक
करण
कौलव 08:20 तक
तैतिल 21:03 तक
गर 09:35, 30 मई तक
चंद्र राशि
कुंभ 05:09, 30 मई तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:13
सूर्यास्त
18:54
चंद्रोदय
00:35
चंद्रास्त
12:36
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
08:38 – 10:21
यमगंड
13:46 – 15:28
गुलिक काल
05:13 – 06:55

29 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:13 – 06:55टालें
शुभ06:55 – 08:38शुभ
रोग08:38 – 10:21टालें
उद्वेग10:21 – 12:03टालें
चर12:03 – 13:46सामान्य
लाभ13:46 – 15:28शुभ
अमृत15:28 – 17:11शुभ
काल17:11 – 18:54टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:54 – 20:11शुभ
उद्वेग20:11 – 21:28टालें
शुभ21:28 – 22:46शुभ
अमृत22:46 – 00:03शुभ
चर00:03 – 01:20सामान्य
रोग01:20 – 02:38टालें
काल02:38 – 03:55टालें
लाभ03:55 – 05:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1306:21दिन
गुरु06:2107:30दिन
मंगल07:3008:38दिन
सूर्य08:3809:46दिन
शुक्र09:4610:55दिन
बुध10:5512:03दिन
चंद्र12:0313:12दिन
शनि13:1214:20दिन
गुरु14:2015:28दिन
मंगल15:2816:37दिन
सूर्य16:3717:45दिन
शुक्र17:4518:54दिन
बुध18:5419:45रात
चंद्र19:4520:37रात
शनि20:3721:28रात
गुरु21:2822:20रात
मंगल22:2023:11रात
सूर्य23:1100:03रात
शुक्र00:0300:55रात
बुध00:5501:46रात
चंद्र01:4602:38रात
शनि02:3803:29रात
गुरु03:2904:21रात
मंगल04:2105:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 मई 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 जून 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जून 2027ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
8 जून 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जून 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जून 2027मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 जून 2027ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
23 जून 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जून 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2399° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।