15 जुलाई 2027 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 15 जुलाई 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 15 जुलाई 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (14:41 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (05:39, 16 जुल॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 19:02 पर है। राहुकाल 13:54 से 15:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 19:02
रात 05:22 तक
तिथि
द्वादशी, 14:41 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जुलाई 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 14:41 तक
शुक्ल त्रयोदशी 16:35, 16 जुल॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 05:39, 16 जुल॰ तक
योग
शुक्ल 13:03 तक
ब्रह्म 13:35, 16 जुल॰ तक
करण
बालव 14:41 तक
कौलव 03:35, 16 जुल॰ तक
तैतिल 16:35, 16 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
19:02
चंद्रोदय
16:39
चंद्रास्त
02:08
दिनमान
13h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:54 – 15:37
यमगंड
05:21 – 07:04
गुलिक काल
08:46 – 10:29

15 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:21 – 07:04शुभ
रोग07:04 – 08:46टालें
उद्वेग08:46 – 10:29टालें
चर10:29 – 12:12सामान्य
लाभ12:12 – 13:54शुभ
अमृत13:54 – 15:37शुभ
काल15:37 – 17:19टालें
शुभ17:19 – 19:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:02 – 20:19शुभ
चर20:19 – 21:37सामान्य
रोग21:37 – 22:54टालें
काल22:54 – 00:12टालें
लाभ00:12 – 01:29शुभ
उद्वेग01:29 – 02:47टालें
शुभ02:47 – 04:04शुभ
अमृत04:04 – 05:22शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2106:30दिन
मंगल06:3007:38दिन
सूर्य07:3808:46दिन
शुक्र08:4609:55दिन
बुध09:5511:03दिन
चंद्र11:0312:12दिन
शनि12:1213:20दिन
गुरु13:2014:28दिन
मंगल14:2815:37दिन
सूर्य15:3716:45दिन
शुक्र16:4517:53दिन
बुध17:5319:02दिन
चंद्र19:0219:53रात
शनि19:5320:45रात
गुरु20:4521:37रात
मंगल21:3722:28रात
सूर्य22:2823:20रात
शुक्र23:2000:12रात
बुध00:1201:03रात
चंद्र01:0301:55रात
शनि01:5502:47रात
गुरु02:4703:39रात
मंगल03:3904:30रात
सूर्य04:3005:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2417° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।