18 जुलाई 2027 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 18 जुलाई 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 18 जुलाई 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (21:14 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (11:18 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 17:19 से 19:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 19:01
रात 05:23 तक
तिथि
पूर्णिमा, 21:14 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 11:18 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 जुलाई 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
पूर्णिमा 21:14 तक
कृष्ण प्रतिपदा 23:48, 19 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 14:23, 19 जुल॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 15:21 तक
विष्कंभअशुभ 16:26, 19 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:00 तक
बव 21:14 तक
बालव 10:31, 19 जुल॰ तक
चंद्र राशि
धनु 18:04 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
18:58
चंद्रास्त
04:48
दिनमान
13h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
17:19 – 19:01
यमगंड
12:12 – 13:54
गुलिक काल
15:36 – 17:19

18 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:23 – 07:05टालें
चर07:05 – 08:47सामान्य
लाभ08:47 – 10:30शुभ
अमृत10:30 – 12:12शुभ
काल12:12 – 13:54टालें
शुभ13:54 – 15:36शुभ
रोग15:36 – 17:19टालें
उद्वेग17:19 – 19:01टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:01 – 20:19शुभ
अमृत20:19 – 21:36शुभ
चर21:36 – 22:54सामान्य
रोग22:54 – 00:12टालें
काल00:12 – 01:30टालें
लाभ01:30 – 02:48शुभ
उद्वेग02:48 – 04:06टालें
शुभ04:06 – 05:23शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2306:31दिन
शुक्र06:3107:39दिन
बुध07:3908:47दिन
चंद्र08:4709:56दिन
शनि09:5611:04दिन
गुरु11:0412:12दिन
मंगल12:1213:20दिन
सूर्य13:2014:28दिन
शुक्र14:2815:36दिन
बुध15:3616:45दिन
चंद्र16:4517:53दिन
शनि17:5319:01दिन
गुरु19:0119:53रात
मंगल19:5320:45रात
सूर्य20:4521:36रात
शुक्र21:3622:28रात
बुध22:2823:20रात
चंद्र23:2000:12रात
शनि00:1201:04रात
गुरु01:0401:56रात
मंगल01:5602:48रात
सूर्य02:4803:40रात
शुक्र03:4004:31रात
बुध04:3105:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2418° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।