30 जुलाई 2027 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 30 जुलाई 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 30 जुलाई 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (02:18, 31 जुल॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (01:24, 31 जुल॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 10:31 से 12:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 18:55
रात 05:29 तक
तिथि
द्वादशी, 02:18 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 01:24 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जुलाई 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 02:18, 31 जुल॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 22:58, 31 जुल॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 01:24, 31 जुल॰ तक
आर्द्रा 22:53, 31 जुल॰ तक
योग
ध्रुव 10:14 तक
व्याघातअशुभ 06:41, 31 जुल॰ तक
करण
कौलव 15:49 तक
तैतिल 02:18, 31 जुल॰ तक
गर 12:41, 31 जुल॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 14:30 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
01:37
चंद्रास्त
16:13
दिनमान
13h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:31 – 12:12
यमगंड
15:34 – 17:14
गुलिक काल
07:10 – 08:51

30 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:29 – 07:10सामान्य
लाभ07:10 – 08:51शुभ
अमृत08:51 – 10:31शुभ
काल10:31 – 12:12टालें
शुभ12:12 – 13:53शुभ
रोग13:53 – 15:34टालें
उद्वेग15:34 – 17:14टालें
चर17:14 – 18:55सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:55 – 20:14टालें
काल20:14 – 21:34टालें
लाभ21:34 – 22:53शुभ
उद्वेग22:53 – 00:12टालें
शुभ00:12 – 01:32शुभ
अमृत01:32 – 02:51शुभ
चर02:51 – 04:10सामान्य
रोग04:10 – 05:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2906:36दिन
बुध06:3607:43दिन
चंद्र07:4308:51दिन
शनि08:5109:58दिन
गुरु09:5811:05दिन
मंगल11:0512:12दिन
सूर्य12:1213:19दिन
शुक्र13:1914:26दिन
बुध14:2615:34दिन
चंद्र15:3416:41दिन
शनि16:4117:48दिन
गुरु17:4818:55दिन
मंगल18:5519:48रात
सूर्य19:4820:41रात
शुक्र20:4121:34रात
बुध21:3422:27रात
चंद्र22:2723:19रात
शनि23:1900:12रात
गुरु00:1201:05रात
मंगल01:0501:58रात
सूर्य01:5802:51रात
शुक्र02:5103:44रात
बुध03:4404:37रात
चंद्र04:3705:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2423° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।