15 अगस्त 2027 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 15 अगस्त 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 15 अगस्त 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (07:54 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (20:28 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 17:05 से 18:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 18:43
रात 05:38 तक
तिथि
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 20:28 तक
श्रवण
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अगस्त 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 07:54 तक
शुक्ल चतुर्दशी 10:29, 16 अग॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 23:34, 16 अग॰ तक
योग
आयुष्मान 23:36 तक
सौभाग्य 00:40, 17 अग॰ तक
करण
तैतिल 07:54 तक
गर 21:12 तक
वणिज 10:29, 16 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
17:36
चंद्रास्त
03:38
दिनमान
13h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:54
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
17:05 – 18:43
यमगंड
12:10 – 13:48
गुलिक काल
15:27 – 17:05

15 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:37 – 07:15टालें
चर07:15 – 08:54सामान्य
लाभ08:54 – 10:32शुभ
अमृत10:32 – 12:10शुभ
काल12:10 – 13:48टालें
शुभ13:48 – 15:27शुभ
रोग15:27 – 17:05टालें
उद्वेग17:05 – 18:43टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:43 – 20:05शुभ
अमृत20:05 – 21:27शुभ
चर21:27 – 22:49सामान्य
रोग22:49 – 00:10टालें
काल00:10 – 01:32टालें
लाभ01:32 – 02:54शुभ
उद्वेग02:54 – 04:16टालें
शुभ04:16 – 05:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3706:43दिन
शुक्र06:4307:48दिन
बुध07:4808:54दिन
चंद्र08:5409:59दिन
शनि09:5911:05दिन
गुरु11:0512:10दिन
मंगल12:1013:16दिन
सूर्य13:1614:21दिन
शुक्र14:2115:27दिन
बुध15:2716:32दिन
चंद्र16:3217:38दिन
शनि17:3818:43दिन
गुरु18:4319:38रात
मंगल19:3820:32रात
सूर्य20:3221:27रात
शुक्र21:2722:21रात
बुध22:2123:16रात
चंद्र23:1600:10रात
शनि00:1001:05रात
गुरु01:0501:59रात
मंगल01:5902:54रात
सूर्य02:5403:49रात
शुक्र03:4904:43रात
बुध04:4305:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2429° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।