18 अगस्त 2027 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 18 अगस्त 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 18 अगस्त 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (15:16 तक), नक्षत्र शतभिषा (05:15, 19 अग॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 18:40 पर है। राहुकाल 12:09 से 13:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 18:40
रात 05:39 तक
तिथि
प्रतिपदा, 15:16 तक
द्वितीया
नक्षत्र
शतभिषा, 05:15 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अगस्त 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 15:16 तक
कृष्ण द्वितीया 17:16, 19 अग॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 05:15, 19 अग॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 07:39, 20 अग॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 02:22, 19 अग॰ तक
सुकर्मा 02:52, 20 अग॰ तक
करण
कौलव 15:16 तक
तैतिल 04:18, 19 अग॰ तक
गर 17:16, 19 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
18:40
चंद्रोदय
19:11
चंद्रास्त
06:19
दिनमान
13h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:36 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:09 – 13:47
यमगंड
07:16 – 08:54
गुलिक काल
10:32 – 12:09

18 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:39 – 07:16शुभ
अमृत07:16 – 08:54शुभ
काल08:54 – 10:32टालें
शुभ10:32 – 12:09शुभ
रोग12:09 – 13:47टालें
उद्वेग13:47 – 15:25टालें
चर15:25 – 17:03सामान्य
लाभ17:03 – 18:40शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:40 – 20:03टालें
शुभ20:03 – 21:25शुभ
अमृत21:25 – 22:47शुभ
चर22:47 – 00:10सामान्य
रोग00:10 – 01:32टालें
काल01:32 – 02:54टालें
लाभ02:54 – 04:17शुभ
उद्वेग04:17 – 05:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3906:44दिन
चंद्र06:4407:49दिन
शनि07:4908:54दिन
गुरु08:5409:59दिन
मंगल09:5911:04दिन
सूर्य11:0412:09दिन
शुक्र12:0913:15दिन
बुध13:1514:20दिन
चंद्र14:2015:25दिन
शनि15:2516:30दिन
गुरु16:3017:35दिन
मंगल17:3518:40दिन
सूर्य18:4019:35रात
शुक्र19:3520:30रात
बुध20:3021:25रात
चंद्र21:2522:20रात
शनि22:2023:15रात
गुरु23:1500:10रात
मंगल00:1001:05रात
सूर्य01:0501:59रात
शुक्र01:5902:54रात
बुध02:5403:49रात
चंद्र03:4904:44रात
शनि04:4405:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2430° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।