8 सितंबर 2027 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 8 सितंबर 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 8 सितंबर 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (12:44 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (18:17 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 12:03 से 13:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 18:19
रात 05:48 तक
तिथि
अष्टमी, 12:44 तक
नवमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 18:17 तक
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 12:44 तक
शुक्ल नवमी 14:39, 9 सित॰ तक
नक्षत्र
मूल 20:52, 9 सित॰ तक
योग
प्रीति 03:55, 9 सित॰ तक
आयुष्मान 04:39, 10 सित॰ तक
करण
बव 12:44 तक
बालव 01:37, 9 सित॰ तक
कौलव 14:39, 9 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
13:21
चंद्रास्त
23:41
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:28 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:03 – 13:37
यमगंड
07:22 – 08:56
गुलिक काल
10:30 – 12:03

8 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:48 – 07:22शुभ
अमृत07:22 – 08:56शुभ
काल08:56 – 10:30टालें
शुभ10:30 – 12:03शुभ
रोग12:03 – 13:37टालें
उद्वेग13:37 – 15:11टालें
चर15:11 – 16:45सामान्य
लाभ16:45 – 18:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:19 – 19:45टालें
शुभ19:45 – 21:11शुभ
अमृत21:11 – 22:37शुभ
चर22:37 – 00:04सामान्य
रोग00:04 – 01:30टालें
काल01:30 – 02:56टालें
लाभ02:56 – 04:22शुभ
उद्वेग04:22 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4806:51दिन
चंद्र06:5107:53दिन
शनि07:5308:56दिन
गुरु08:5609:58दिन
मंगल09:5811:01दिन
सूर्य11:0112:03दिन
शुक्र12:0313:06दिन
बुध13:0614:08दिन
चंद्र14:0815:11दिन
शनि15:1116:14दिन
गुरु16:1417:16दिन
मंगल17:1618:19दिन
सूर्य18:1919:16रात
शुक्र19:1620:14रात
बुध20:1421:11रात
चंद्र21:1122:09रात
शनि22:0923:06रात
गुरु23:0600:04रात
मंगल00:0401:01रात
सूर्य01:0101:59रात
शुक्र01:5902:56रात
बुध02:5603:53रात
चंद्र03:5304:51रात
शनि04:5105:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2438° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।