6 दिसंबर 2027 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 6 दिसंबर 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 6 दिसंबर 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (00:00, 7 दिस॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (11:40 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 08:00 से 09:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 17:12
रात 06:41 तक
तिथि
अष्टमी, 00:00 तक
नवमी
नक्षत्र
शतभिषा, 11:40 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 00:00, 7 दिस॰ तक
शुक्ल नवमी 01:51, 8 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 11:40 तक
पूर्वा भाद्रपद 14:15, 7 दिस॰ तक
योग
वज्रअशुभ 06:47, 7 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:52 तक
बव 00:00, 7 दिस॰ तक
बालव 13:00, 7 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
12:11
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
08:00 – 09:19
यमगंड
10:37 – 11:56
गुलिक काल
13:15 – 14:34

6 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:41 – 08:00शुभ
काल08:00 – 09:19टालें
शुभ09:19 – 10:37शुभ
रोग10:37 – 11:56टालें
उद्वेग11:56 – 13:15टालें
चर13:15 – 14:34सामान्य
लाभ14:34 – 15:53शुभ
अमृत15:53 – 17:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:12 – 18:53सामान्य
रोग18:53 – 20:35टालें
काल20:35 – 22:16टालें
लाभ22:16 – 23:57शुभ
उद्वेग23:57 – 01:38टालें
शुभ01:38 – 03:19शुभ
अमृत03:19 – 05:00शुभ
चर05:00 – 06:41सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4107:33दिन
शनि07:3308:26दिन
गुरु08:2609:19दिन
मंगल09:1910:11दिन
सूर्य10:1111:04दिन
शुक्र11:0411:56दिन
बुध11:5612:49दिन
चंद्र12:4913:42दिन
शनि13:4214:34दिन
गुरु14:3415:27दिन
मंगल15:2716:20दिन
सूर्य16:2017:12दिन
शुक्र17:1218:20रात
बुध18:2019:27रात
चंद्र19:2720:35रात
शनि20:3521:42रात
गुरु21:4222:49रात
मंगल22:4923:57रात
सूर्य23:5701:04रात
शुक्र01:0402:12रात
बुध02:1203:19रात
चंद्र03:1904:26रात
शनि04:2605:34रात
गुरु05:3406:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2472° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।