8 दिसंबर 2027 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 8 दिसंबर 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 8 दिसंबर 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (02:59, 9 दिस॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (16:13 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 11:57 से 13:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:13
रात 06:43 तक
तिथि
दशमी, 02:59 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 16:13 तक
रेवती
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 02:59, 9 दिस॰ तक
शुक्ल एकादशी 03:20, 10 दिस॰ तक
नक्षत्र
रेवती 17:27, 9 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 06:57 तक
व्यतीपातअशुभ 06:35, 9 दिस॰ तक
वरीयान 05:35, 10 दिस॰ तक
करण
तैतिल 14:30 तक
गर 02:59, 9 दिस॰ तक
वणिज 15:15, 9 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
13:09
चंद्रास्त
01:15
दिनमान
10h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:48
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:18 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:57 – 13:16
यमगंड
08:01 – 09:20
गुलिक काल
10:38 – 11:57

8 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:42 – 08:01शुभ
अमृत08:01 – 09:20शुभ
काल09:20 – 10:38टालें
शुभ10:38 – 11:57शुभ
रोग11:57 – 13:16टालें
उद्वेग13:16 – 14:35टालें
चर14:35 – 15:54सामान्य
लाभ15:54 – 17:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:13 – 18:54टालें
शुभ18:54 – 20:35शुभ
अमृत20:35 – 22:16शुभ
चर22:16 – 23:58सामान्य
रोग23:58 – 01:39टालें
काल01:39 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 05:01शुभ
उद्वेग05:01 – 06:43टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4207:35दिन
चंद्र07:3508:27दिन
शनि08:2709:20दिन
गुरु09:2010:12दिन
मंगल10:1211:05दिन
सूर्य11:0511:57दिन
शुक्र11:5712:50दिन
बुध12:5013:42दिन
चंद्र13:4214:35दिन
शनि14:3515:28दिन
गुरु15:2816:20दिन
मंगल16:2017:13दिन
सूर्य17:1318:20रात
शुक्र18:2019:28रात
बुध19:2820:35रात
चंद्र20:3521:43रात
शनि21:4322:50रात
गुरु22:5023:58रात
मंगल23:5801:05रात
सूर्य01:0502:13रात
शुक्र02:1303:20रात
बुध03:2004:28रात
चंद्र04:2805:35रात
शनि05:3506:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2473° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।