5 फ़रवरी 2028 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 5 फ़रवरी 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 5 फ़रवरी 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (12:26 तक), नक्षत्र कृत्तिका (12:55 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:49 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 09:35 से 10:57 तक है।

दिन और रात
दिन 06:49 – 17:50
रात 06:49 तक
तिथि
नवमी, 12:26 तक
दशमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 12:55 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल नवमी 12:26 तक
शुक्ल दशमी 11:18, 6 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 12:24, 6 फ़र॰ तक
योग
ब्रह्म 15:32 तक
इंद्र 13:20, 6 फ़र॰ तक
करण
कौलव 12:26 तक
तैतिल 23:58 तक
गर 11:18, 6 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
12:15
चंद्रास्त
01:38
दिनमान
11h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
09:35 – 10:57
यमगंड
13:42 – 15:05
गुलिक काल
06:49 – 08:12

5 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:49 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:35शुभ
रोग09:35 – 10:57टालें
उद्वेग10:57 – 12:20टालें
चर12:20 – 13:42सामान्य
लाभ13:42 – 15:05शुभ
अमृत15:05 – 16:28शुभ
काल16:28 – 17:50टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:50 – 19:28शुभ
उद्वेग19:28 – 21:05टालें
शुभ21:05 – 22:42शुभ
अमृत22:42 – 00:19शुभ
चर00:19 – 01:57सामान्य
रोग01:57 – 03:34टालें
काल03:34 – 05:11टालें
लाभ05:11 – 06:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4907:44दिन
गुरु07:4408:39दिन
मंगल08:3909:35दिन
सूर्य09:3510:30दिन
शुक्र10:3011:25दिन
बुध11:2512:20दिन
चंद्र12:2013:15दिन
शनि13:1514:10दिन
गुरु14:1015:05दिन
मंगल15:0516:00दिन
सूर्य16:0016:55दिन
शुक्र16:5517:50दिन
बुध17:5018:55रात
चंद्र18:5520:00रात
शनि20:0021:05रात
गुरु21:0522:10रात
मंगल22:1023:15रात
सूर्य23:1500:19रात
शुक्र00:1901:24रात
बुध01:2402:29रात
चंद्र02:2903:34रात
शनि03:3404:39रात
गुरु04:3905:44रात
मंगल05:4406:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2495° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।