22 फ़रवरी 2028 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (08:08 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (22:51 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 15:11 से 16:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 18:02
रात 06:36 तक
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 22:51 तक
श्रवण
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 08:08 तक
कृष्ण त्रयोदशी 10:44, 23 फ़र॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 01:57, 24 फ़र॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 17:49 तक
वरीयान 18:47, 23 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 08:08 तक
गर 21:25 तक
वणिज 10:44, 23 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
04:36
चंद्रास्त
15:26
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:56 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
15:11 – 16:36
यमगंड
09:28 – 10:54
गुलिक काल
12:19 – 13:45

22 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:37 – 08:02टालें
उद्वेग08:02 – 09:28टालें
चर09:28 – 10:54सामान्य
लाभ10:54 – 12:19शुभ
अमृत12:19 – 13:45शुभ
काल13:45 – 15:11टालें
शुभ15:11 – 16:36शुभ
रोग16:36 – 18:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:02 – 19:36टालें
लाभ19:36 – 21:10शुभ
उद्वेग21:10 – 22:45टालें
शुभ22:45 – 00:19शुभ
अमृत00:19 – 01:53शुभ
चर01:53 – 03:27सामान्य
रोग03:27 – 05:02टालें
काल05:02 – 06:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3707:34दिन
सूर्य07:3408:31दिन
शुक्र08:3109:28दिन
बुध09:2810:25दिन
चंद्र10:2511:22दिन
शनि11:2212:19दिन
गुरु12:1913:17दिन
मंगल13:1714:14दिन
सूर्य14:1415:11दिन
शुक्र15:1116:08दिन
बुध16:0817:05दिन
चंद्र17:0518:02दिन
शनि18:0219:05रात
गुरु19:0520:08रात
मंगल20:0821:10रात
सूर्य21:1022:13रात
शुक्र22:1323:16रात
बुध23:1600:19रात
चंद्र00:1901:22रात
शनि01:2202:25रात
गुरु02:2503:27रात
मंगल03:2704:30रात
सूर्य04:3005:33रात
शुक्र05:3306:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2502° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।