22 मई 2028 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 22 मई 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 22 मई 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (14:02 तक), नक्षत्र अश्विनी (13:41 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:15 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 06:57 से 08:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:15 – 18:50
रात 05:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 14:02 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
अश्विनी, 13:41 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 मई 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 14:02 तक
कृष्ण चतुर्दशी 14:10, 23 मई तक
नक्षत्र
भरणी 14:30, 23 मई तक
योग
सौभाग्य 18:02 तक
शोभन 17:03, 23 मई तक
करण
वणिज 14:02 तक
विष्टि (भद्रा) 02:10, 23 मई तक
शकुनि 14:10, 23 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:15
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
03:23
चंद्रास्त
17:05
दिनमान
13h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
06:57 – 08:39
यमगंड
10:21 – 12:03
गुलिक काल
13:44 – 15:26

22 मई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:15 – 06:57शुभ
काल06:57 – 08:39टालें
शुभ08:39 – 10:21शुभ
रोग10:21 – 12:03टालें
उद्वेग12:03 – 13:44टालें
चर13:44 – 15:26सामान्य
लाभ15:26 – 17:08शुभ
अमृत17:08 – 18:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:50 – 20:08सामान्य
रोग20:08 – 21:26टालें
काल21:26 – 22:44टालें
लाभ22:44 – 00:02शुभ
उद्वेग00:02 – 01:20टालें
शुभ01:20 – 02:38शुभ
अमृत02:38 – 03:56शुभ
चर03:56 – 05:14सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1506:23दिन
शनि06:2307:31दिन
गुरु07:3108:39दिन
मंगल08:3909:47दिन
सूर्य09:4710:55दिन
शुक्र10:5512:03दिन
बुध12:0313:10दिन
चंद्र13:1014:18दिन
शनि14:1815:26दिन
गुरु15:2616:34दिन
मंगल16:3417:42दिन
सूर्य17:4218:50दिन
शुक्र18:5019:42रात
बुध19:4220:34रात
चंद्र20:3421:26रात
शनि21:2622:18रात
गुरु22:1823:10रात
मंगल23:1000:02रात
सूर्य00:0200:54रात
शुक्र00:5401:46रात
बुध01:4602:38रात
चंद्र02:3803:30रात
शनि03:3004:22रात
गुरु04:2205:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मई 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 मई 2028ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
28 मई 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 जून 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जून 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जून 2028ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जून 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2536° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।