31 मई 2028 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 31 मई 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 31 मई 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (23:59 तक), नक्षत्र मघा (08:23 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 12:04 से 13:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 18:55
रात 05:12 तक
तिथि
अष्टमी, 23:59 तक
नवमी
नक्षत्र
मघा, 08:23 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 मई 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 23:59 तक
शुक्ल नवमी 21:45, 1 जून तक
नक्षत्र
मघा 08:23 तक
योग
हर्षण 20:06 तक
वज्रअशुभ 17:13, 1 जून तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:06 तक
बव 23:59 तक
बालव 10:52, 1 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
12:00
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
13h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:31 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:04 – 13:46
यमगंड
06:55 – 08:38
गुलिक काल
10:21 – 12:04

31 मई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:12 – 06:55शुभ
अमृत06:55 – 08:38शुभ
काल08:38 – 10:21टालें
शुभ10:21 – 12:04शुभ
रोग12:04 – 13:46टालें
उद्वेग13:46 – 15:29टालें
चर15:29 – 17:12सामान्य
लाभ17:12 – 18:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:55 – 20:12टालें
शुभ20:12 – 21:29शुभ
अमृत21:29 – 22:46शुभ
चर22:46 – 00:03सामान्य
रोग00:03 – 01:21टालें
काल01:21 – 02:38टालें
लाभ02:38 – 03:55शुभ
उद्वेग03:55 – 05:12टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1206:21दिन
चंद्र06:2107:29दिन
शनि07:2908:38दिन
गुरु08:3809:46दिन
मंगल09:4610:55दिन
सूर्य10:5512:04दिन
शुक्र12:0413:12दिन
बुध13:1214:21दिन
चंद्र14:2115:29दिन
शनि15:2916:38दिन
गुरु16:3817:46दिन
मंगल17:4618:55दिन
सूर्य18:5519:46रात
शुक्र19:4620:38रात
बुध20:3821:29रात
चंद्र21:2922:21रात
शनि22:2123:12रात
गुरु23:1200:03रात
मंगल00:0300:55रात
सूर्य00:5501:46रात
शुक्र01:4602:38रात
बुध02:3803:29रात
चंद्र03:2904:21रात
शनि04:2105:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जून 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जून 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जून 2028ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जून 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2540° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।