12 जून 2028 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 12 जून 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 12 जून 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:02 तक), नक्षत्र श्रवण (07:14 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 06:55 से 08:39 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 19:00
रात 05:11 तक
तिथि
पंचमी, 16:02 तक
षष्ठी
नक्षत्र
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जून 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:02 तक
कृष्ण षष्ठी 18:20, 13 जून तक
नक्षत्र
श्रवण 07:14 तक
धनिष्ठा 10:03, 13 जून तक
योग
वैधृतिअशुभ 00:30, 13 जून तक
विष्कंभअशुभ 01:27, 14 जून तक
करण
तैतिल 16:02 तक
गर 05:09, 13 जून तक
वणिज 18:20, 13 जून तक
चंद्र राशि
मकर 20:36 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
22:48
चंद्रास्त
09:36
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
06:55 – 08:39
यमगंड
10:22 – 12:06
गुलिक काल
13:49 – 15:33

12 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:11 – 06:55शुभ
काल06:55 – 08:39टालें
शुभ08:39 – 10:22शुभ
रोग10:22 – 12:06टालें
उद्वेग12:06 – 13:49टालें
चर13:49 – 15:33सामान्य
लाभ15:33 – 17:16शुभ
अमृत17:16 – 19:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:00 – 20:16सामान्य
रोग20:16 – 21:33टालें
काल21:33 – 22:49टालें
लाभ22:49 – 00:06शुभ
उद्वेग00:06 – 01:22टालें
शुभ01:22 – 02:39शुभ
अमृत02:39 – 03:55शुभ
चर03:55 – 05:11सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:1106:20दिन
शनि06:2007:30दिन
गुरु07:3008:39दिन
मंगल08:3909:48दिन
सूर्य09:4810:57दिन
शुक्र10:5712:06दिन
बुध12:0613:15दिन
चंद्र13:1514:24दिन
शनि14:2415:33दिन
गुरु15:3316:42दिन
मंगल16:4217:51दिन
सूर्य17:5119:00दिन
शुक्र19:0019:51रात
बुध19:5120:42रात
चंद्र20:4221:33रात
शनि21:3322:24रात
गुरु22:2423:15रात
मंगल23:1500:06रात
सूर्य00:0600:57रात
शुक्र00:5701:48रात
बुध01:4802:39रात
चंद्र02:3903:30रात
शनि03:3004:21रात
गुरु04:2105:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2544° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।