20 जून 2028 को लखनऊ का पंचांग

मंगलवार, 20 जून 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 जून 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (02:48, 21 जून तक), नक्षत्र कृत्तिका (23:35 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 19:02 पर है। राहुकाल 15:35 से 17:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 19:02
रात 05:13 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:48 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 23:35 तक
रोहिणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जून 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 02:48, 21 जून तक
कृष्ण चतुर्दशी 01:38, 22 जून तक
नक्षत्र
रोहिणी 23:14, 21 जून तक
योग
धृति 01:16, 21 जून तक
शूलअशुभ 23:20, 21 जून तक
करण
गर 15:10 तक
वणिज 02:48, 21 जून तक
विष्टि (भद्रा) 14:17, 21 जून तक
चंद्र राशि
मेष 05:27 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
19:02
चंद्रोदय
02:39
चंद्रास्त
16:51
दिनमान
13h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
15:35 – 17:19
यमगंड
08:40 – 10:24
गुलिक काल
12:07 – 13:51

20 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:12 – 06:56टालें
उद्वेग06:56 – 08:40टालें
चर08:40 – 10:24सामान्य
लाभ10:24 – 12:07शुभ
अमृत12:07 – 13:51शुभ
काल13:51 – 15:35टालें
शुभ15:35 – 17:19शुभ
रोग17:19 – 19:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:02 – 20:19टालें
लाभ20:19 – 21:35शुभ
उद्वेग21:35 – 22:51टालें
शुभ22:51 – 00:07शुभ
अमृत00:07 – 01:24शुभ
चर01:24 – 02:40सामान्य
रोग02:40 – 03:56टालें
काल03:56 – 05:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:1206:22दिन
सूर्य06:2207:31दिन
शुक्र07:3108:40दिन
बुध08:4009:49दिन
चंद्र09:4910:58दिन
शनि10:5812:07दिन
गुरु12:0713:17दिन
मंगल13:1714:26दिन
सूर्य14:2615:35दिन
शुक्र15:3516:44दिन
बुध16:4417:53दिन
चंद्र17:5319:02दिन
शनि19:0219:53रात
गुरु19:5320:44रात
मंगल20:4421:35रात
सूर्य21:3522:26रात
शुक्र22:2623:17रात
बुध23:1700:07रात
चंद्र00:0700:58रात
शनि00:5801:49रात
गुरु01:4902:40रात
मंगल02:4003:31रात
सूर्य03:3104:22रात
शुक्र04:2205:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
10 जुल॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जुल॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 जुल॰ 2028कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2547° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।