5 अगस्त 2028 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 5 अगस्त 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 5 अगस्त 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (13:39 तक), नक्षत्र श्रवण (21:57 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 18:51
रात 05:33 तक
तिथि
पूर्णिमा, 13:39 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
श्रवण, 21:57 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अगस्त 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
पूर्णिमा 13:39 तक
कृष्ण प्रतिपदा 15:45, 6 अग॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 21:57 तक
धनिष्ठा 00:42, 7 अग॰ तक
योग
आयुष्मान 16:42 तक
सौभाग्य 17:26, 6 अग॰ तक
करण
बव 13:39 तक
बालव 02:40, 6 अग॰ तक
कौलव 15:45, 6 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
18:48
चंद्रास्त
05:20
दिनमान
13h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:32
यमगंड
13:51 – 15:31
गुलिक काल
05:32 – 07:12

5 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:32 – 07:12टालें
शुभ07:12 – 08:52शुभ
रोग08:52 – 10:32टालें
उद्वेग10:32 – 12:12टालें
चर12:12 – 13:51सामान्य
लाभ13:51 – 15:31शुभ
अमृत15:31 – 17:11शुभ
काल17:11 – 18:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:51 – 20:11शुभ
उद्वेग20:11 – 21:31टालें
शुभ21:31 – 22:51शुभ
अमृत22:51 – 00:12शुभ
चर00:12 – 01:32सामान्य
रोग01:32 – 02:52टालें
काल02:52 – 04:13टालें
लाभ04:13 – 05:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3206:39दिन
गुरु06:3907:45दिन
मंगल07:4508:52दिन
सूर्य08:5209:59दिन
शुक्र09:5911:05दिन
बुध11:0512:12दिन
चंद्र12:1213:18दिन
शनि13:1814:25दिन
गुरु14:2515:31दिन
मंगल15:3116:38दिन
सूर्य16:3817:44दिन
शुक्र17:4418:51दिन
बुध18:5119:44रात
चंद्र19:4420:38रात
शनि20:3821:31रात
गुरु21:3122:25रात
मंगल22:2523:18रात
सूर्य23:1800:12रात
शुक्र00:1201:05रात
बुध01:0501:59रात
चंद्र01:5902:52रात
शनि02:5203:46रात
गुरु03:4604:39रात
मंगल04:3905:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अग॰ 2028श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
9 अग॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2565° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।