20 नवंबर 2028 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 20 नवंबर 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 20 नवंबर 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (13:07 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (21:19 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 07:50 से 09:10 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 17:13
रात 06:30 तक
तिथि
चतुर्थी, 13:07 तक
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 21:19 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 नवंबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 13:07 तक
शुक्ल पंचमी 13:34, 21 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 22:36, 21 नव॰ तक
योग
शूलअशुभ 19:08 तक
गंडअशुभ 18:28, 21 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:07 तक
बव 01:15, 21 नव॰ तक
बालव 13:34, 21 नव॰ तक
चंद्र राशि
धनु 03:34, 21 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
10:01
चंद्रास्त
20:48
दिनमान
10h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
07:50 – 09:10
यमगंड
10:31 – 11:51
गुलिक काल
13:12 – 14:32

20 नवंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:29 – 07:50शुभ
काल07:50 – 09:10टालें
शुभ09:10 – 10:31शुभ
रोग10:31 – 11:51टालें
उद्वेग11:51 – 13:12टालें
चर13:12 – 14:32सामान्य
लाभ14:32 – 15:53शुभ
अमृत15:53 – 17:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:13 – 18:53सामान्य
रोग18:53 – 20:33टालें
काल20:33 – 22:12टालें
लाभ22:12 – 23:52शुभ
उद्वेग23:52 – 01:31टालें
शुभ01:31 – 03:11शुभ
अमृत03:11 – 04:50शुभ
चर04:50 – 06:30सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2907:23दिन
शनि07:2308:17दिन
गुरु08:1709:10दिन
मंगल09:1010:04दिन
सूर्य10:0410:58दिन
शुक्र10:5811:51दिन
बुध11:5112:45दिन
चंद्र12:4513:39दिन
शनि13:3914:32दिन
गुरु14:3215:26दिन
मंगल15:2616:20दिन
सूर्य16:2017:13दिन
शुक्र17:1318:20रात
बुध18:2019:26रात
चंद्र19:2620:33रात
शनि20:3321:39रात
गुरु21:3922:45रात
मंगल22:4523:52रात
सूर्य23:5200:58रात
शुक्र00:5802:04रात
बुध02:0403:11रात
चंद्र03:1104:17रात
शनि04:1705:24रात
गुरु05:2406:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 नव॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 नव॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 दिस॰ 2028मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
5 दिस॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2606° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।