3 दिसंबर 2028 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 3 दिसंबर 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 3 दिसंबर 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (07:11 तक), नक्षत्र मृगशिरा (20:53 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:39 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 15:53 से 17:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:39 – 17:12
रात 06:40 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
मृगशिरा, 20:53 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 दिसंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 07:11 तक
कृष्ण द्वितीया 06:48, 4 दिस॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 20:54, 4 दिस॰ तक
योग
साध्य 19:05 तक
शुभ 17:26, 4 दिस॰ तक
करण
कौलव 07:11 तक
तैतिल 19:03 तक
गर 06:48, 4 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 08:44 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
18:19
चंद्रास्त
07:42
दिनमान
10h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:51 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:17

अशुभ समय

राहुकाल
15:53 – 17:12
यमगंड
11:56 – 13:15
गुलिक काल
14:34 – 15:53

3 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:39 – 07:58टालें
चर07:58 – 09:17सामान्य
लाभ09:17 – 10:36शुभ
अमृत10:36 – 11:56शुभ
काल11:56 – 13:15टालें
शुभ13:15 – 14:34शुभ
रोग14:34 – 15:53टालें
उद्वेग15:53 – 17:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:12 – 18:53शुभ
अमृत18:53 – 20:34शुभ
चर20:34 – 22:15सामान्य
रोग22:15 – 23:56टालें
काल23:56 – 01:37टालें
लाभ01:37 – 03:18शुभ
उद्वेग03:18 – 04:59टालें
शुभ04:59 – 06:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3907:32दिन
शुक्र07:3208:24दिन
बुध08:2409:17दिन
चंद्र09:1710:10दिन
शनि10:1011:03दिन
गुरु11:0311:56दिन
मंगल11:5612:48दिन
सूर्य12:4813:41दिन
शुक्र13:4114:34दिन
बुध14:3415:27दिन
चंद्र15:2716:19दिन
शनि16:1917:12दिन
गुरु17:1218:19रात
मंगल18:1919:27रात
सूर्य19:2720:34रात
शुक्र20:3421:41रात
बुध21:4122:49रात
चंद्र22:4923:56रात
शनि23:5601:03रात
गुरु01:0302:11रात
मंगल02:1103:18रात
सूर्य03:1804:25रात
शुक्र04:2505:32रात
बुध05:3206:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 दिस॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2611° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।