8 दिसंबर 2028 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (00:09, 9 दिस॰ तक), नक्षत्र मघा (17:59 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 10:39 से 11:58 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:13
रात 06:43 तक
तिथि
सप्तमी, 00:09 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मघा, 17:59 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 00:09, 9 दिस॰ तक
कृष्ण अष्टमी 22:05, 9 दिस॰ तक
नक्षत्र
मघा 17:59 तक
पूर्वा फाल्गुनी 16:40, 9 दिस॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 08:23 तक
विष्कंभअशुभ 05:37, 9 दिस॰ तक
प्रीति 02:42, 10 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:06 तक
बव 00:09, 9 दिस॰ तक
बालव 11:08, 9 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
23:30
चंद्रास्त
11:25
दिनमान
10h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:49
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
10:39 – 11:58
यमगंड
14:35 – 15:54
गुलिक काल
08:01 – 09:20

8 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:42 – 08:01सामान्य
लाभ08:01 – 09:20शुभ
अमृत09:20 – 10:39शुभ
काल10:39 – 11:58टालें
शुभ11:58 – 13:16शुभ
रोग13:16 – 14:35टालें
उद्वेग14:35 – 15:54टालें
चर15:54 – 17:13सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:13 – 18:54टालें
काल18:54 – 20:35टालें
लाभ20:35 – 22:17शुभ
उद्वेग22:17 – 23:58टालें
शुभ23:58 – 01:39शुभ
अमृत01:39 – 03:21शुभ
चर03:21 – 05:02सामान्य
रोग05:02 – 06:43टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4207:35दिन
बुध07:3508:28दिन
चंद्र08:2809:20दिन
शनि09:2010:13दिन
गुरु10:1311:05दिन
मंगल11:0511:58दिन
सूर्य11:5812:50दिन
शुक्र12:5013:43दिन
बुध13:4314:35दिन
चंद्र14:3515:28दिन
शनि15:2816:20दिन
गुरु16:2017:13दिन
मंगल17:1318:20रात
सूर्य18:2019:28रात
शुक्र19:2820:35रात
बुध20:3521:43रात
चंद्र21:4322:50रात
शनि22:5023:58रात
गुरु23:5801:06रात
मंगल01:0602:13रात
सूर्य02:1303:21रात
शुक्र03:2104:28रात
बुध04:2805:36रात
चंद्र05:3606:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
19 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2613° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।