6 जून 2029 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 6 जून 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 6 जून 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (00:21, 7 जून तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (13:25 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 12:04 से 13:48 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:58
रात 05:11 तक
तिथि
दशमी, 00:21 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 13:25 तक
रेवती
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 जून 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण दशमी 00:21, 7 जून तक
कृष्ण एकादशी 02:43, 8 जून तक
नक्षत्र
रेवती 16:23, 7 जून तक
योग
आयुष्मान 16:35 तक
सौभाग्य 17:33, 7 जून तक
करण
वणिज 11:09 तक
विष्टि (भद्रा) 00:21, 7 जून तक
बव 13:33, 7 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
01:04
चंद्रास्त
13:57
दिनमान
13h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:32 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:04 – 13:48
यमगंड
06:55 – 08:38
गुलिक काल
10:21 – 12:04

6 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:11 – 06:55शुभ
अमृत06:55 – 08:38शुभ
काल08:38 – 10:21टालें
शुभ10:21 – 12:04शुभ
रोग12:04 – 13:48टालें
उद्वेग13:48 – 15:31टालें
चर15:31 – 17:14सामान्य
लाभ17:14 – 18:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:58 – 20:14टालें
शुभ20:14 – 21:31शुभ
अमृत21:31 – 22:48शुभ
चर22:48 – 00:04सामान्य
रोग00:04 – 01:21टालें
काल01:21 – 02:38टालें
लाभ02:38 – 03:55शुभ
उद्वेग03:55 – 05:11टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1106:20दिन
चंद्र06:2007:29दिन
शनि07:2908:38दिन
गुरु08:3809:47दिन
मंगल09:4710:56दिन
सूर्य10:5612:04दिन
शुक्र12:0413:13दिन
बुध13:1314:22दिन
चंद्र14:2215:31दिन
शनि15:3116:40दिन
गुरु16:4017:49दिन
मंगल17:4918:58दिन
सूर्य18:5819:49रात
शुक्र19:4920:40रात
बुध20:4021:31रात
चंद्र21:3122:22रात
शनि22:2223:13रात
गुरु23:1300:04रात
मंगल00:0400:56रात
सूर्य00:5601:47रात
शुक्र01:4702:38रात
बुध02:3803:29रात
चंद्र03:2904:20रात
शनि04:2005:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जून 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जून 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 जून 2029ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2682° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।