14 जून 2029 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 14 जून 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 14 जून 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (10:03 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (04:43, 15 जून तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:12 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 13:50 से 15:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:12 – 19:01
रात 05:12 तक
तिथि
द्वितीया, 10:03 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुनर्वसु, 04:43 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जून 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 10:03 तक
शुक्ल तृतीया 09:44, 15 जून तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 04:43, 15 जून तक
पुष्य 04:47, 16 जून तक
योग
वृद्धि 17:32 तक
ध्रुव 16:10, 15 जून तक
करण
कौलव 10:03 तक
तैतिल 21:57 तक
गर 09:44, 15 जून तक
चंद्र राशि
मिथुन 22:38 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:12
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
06:58
चंद्रास्त
20:54
दिनमान
13h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:38 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
13:50 – 15:33
यमगंड
05:12 – 06:55
गुलिक काल
08:39 – 10:22

14 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:12 – 06:55शुभ
रोग06:55 – 08:39टालें
उद्वेग08:39 – 10:22टालें
चर10:22 – 12:06सामान्य
लाभ12:06 – 13:50शुभ
अमृत13:50 – 15:33शुभ
काल15:33 – 17:17टालें
शुभ17:17 – 19:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:01 – 20:17शुभ
चर20:17 – 21:33सामान्य
रोग21:33 – 22:50टालें
काल22:50 – 00:06टालें
लाभ00:06 – 01:22शुभ
उद्वेग01:22 – 02:39टालें
शुभ02:39 – 03:55शुभ
अमृत03:55 – 05:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1206:21दिन
मंगल06:2107:30दिन
सूर्य07:3008:39दिन
शुक्र08:3909:48दिन
बुध09:4810:57दिन
चंद्र10:5712:06दिन
शनि12:0613:15दिन
गुरु13:1514:24दिन
मंगल14:2415:33दिन
सूर्य15:3316:42दिन
शुक्र16:4217:51दिन
बुध17:5119:01दिन
चंद्र19:0119:51रात
शनि19:5120:42रात
गुरु20:4221:33रात
मंगल21:3322:24रात
सूर्य22:2423:15रात
शुक्र23:1500:06रात
बुध00:0600:57रात
चंद्र00:5701:48रात
शनि01:4802:39रात
गुरु02:3903:30रात
मंगल03:3004:21रात
सूर्य04:2105:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2685° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।