5 जुलाई 2029 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 5 जुलाई 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 5 जुलाई 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (14:58 तक), नक्षत्र अश्विनी (02:58, 6 जुल॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 13:54 से 15:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 19:03
रात 05:18 तक
तिथि
नवमी, 14:58 तक
दशमी
नक्षत्र
अश्विनी, 02:58 तक
भरणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जुलाई 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 14:58 तक
कृष्ण दशमी 17:11, 6 जुल॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 02:58, 6 जुल॰ तक
भरणी 05:39, 7 जुल॰ तक
योग
सुकर्मा 03:14, 6 जुल॰ तक
धृति 03:58, 7 जुल॰ तक
करण
गर 14:58 तक
वणिज 04:06, 6 जुल॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:11, 6 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
00:07
चंद्रास्त
13:33
दिनमान
13h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
13:54 – 15:37
यमगंड
05:17 – 07:00
गुलिक काल
08:44 – 10:27

5 जुलाई 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:17 – 07:00शुभ
रोग07:00 – 08:44टालें
उद्वेग08:44 – 10:27टालें
चर10:27 – 12:10सामान्य
लाभ12:10 – 13:54शुभ
अमृत13:54 – 15:37शुभ
काल15:37 – 17:20टालें
शुभ17:20 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:03 – 20:20शुभ
चर20:20 – 21:37सामान्य
रोग21:37 – 22:54टालें
काल22:54 – 00:10टालें
लाभ00:10 – 01:27शुभ
उद्वेग01:27 – 02:44टालें
शुभ02:44 – 04:01शुभ
अमृत04:01 – 05:18शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1706:26दिन
मंगल06:2607:35दिन
सूर्य07:3508:44दिन
शुक्र08:4409:53दिन
बुध09:5311:01दिन
चंद्र11:0112:10दिन
शनि12:1013:19दिन
गुरु13:1914:28दिन
मंगल14:2815:37दिन
सूर्य15:3716:46दिन
शुक्र16:4617:55दिन
बुध17:5519:03दिन
चंद्र19:0319:55रात
शनि19:5520:46रात
गुरु20:4621:37रात
मंगल21:3722:28रात
सूर्य22:2823:19रात
शुक्र23:1900:10रात
बुध00:1001:02रात
चंद्र01:0201:53रात
शनि01:5302:44रात
गुरु02:4403:35रात
मंगल03:3504:26रात
सूर्य04:2605:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
29 जुल॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2693° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।