6 दिसंबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 6 दिसंबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 6 दिसंबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (17:11 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (13:21 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 17:12 पर है। राहुकाल 13:16 से 14:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 17:12
रात 06:42 तक
तिथि
प्रतिपदा, 17:11 तक
द्वितीया
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 13:21 तक
मूल
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 17:11 तक
शुक्ल द्वितीया 14:25, 7 दिस॰ तक
नक्षत्र
मूल 11:13, 7 दिस॰ तक
योग
धृति 08:00 तक
शूलअशुभ 04:20, 7 दिस॰ तक
गंडअशुभ 01:04, 8 दिस॰ तक
करण
किंस्तुघ्न 06:44 तक
बव 17:11 तक
बालव 03:44, 7 दिस॰ तक
कौलव 14:25, 7 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
17:12
चंद्रोदय
07:16
चंद्रास्त
18:00
दिनमान
10h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
13:16 – 14:35
यमगंड
06:41 – 08:00
गुलिक काल
09:19 – 10:38

6 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:41 – 08:00शुभ
रोग08:00 – 09:19टालें
उद्वेग09:19 – 10:38टालें
चर10:38 – 11:57सामान्य
लाभ11:57 – 13:16शुभ
अमृत13:16 – 14:35शुभ
काल14:35 – 15:54टालें
शुभ15:54 – 17:12शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:12 – 18:54शुभ
चर18:54 – 20:35सामान्य
रोग20:35 – 22:16टालें
काल22:16 – 23:57टालें
लाभ23:57 – 01:38शुभ
उद्वेग01:38 – 03:19टालें
शुभ03:19 – 05:00शुभ
अमृत05:00 – 06:42शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4107:34दिन
मंगल07:3408:26दिन
सूर्य08:2609:19दिन
शुक्र09:1910:11दिन
बुध10:1111:04दिन
चंद्र11:0411:57दिन
शनि11:5712:49दिन
गुरु12:4913:42दिन
मंगल13:4214:35दिन
सूर्य14:3515:27दिन
शुक्र15:2716:20दिन
बुध16:2017:12दिन
चंद्र17:1218:20रात
शनि18:2019:27रात
गुरु19:2720:35रात
मंगल20:3521:42रात
सूर्य21:4222:50रात
शुक्र22:5023:57रात
बुध23:5701:04रात
चंद्र01:0402:12रात
शनि02:1203:19रात
गुरु03:1904:27रात
मंगल04:2705:34रात
सूर्य05:3406:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2752° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।