8 दिसंबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 8 दिसंबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 8 दिसंबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (12:11 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (09:37 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 09:20 से 10:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 17:13
रात 06:43 तक
तिथि
तृतीया, 12:11 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 12:11 तक
शुक्ल चतुर्थी 10:38, 9 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 08:39, 9 दिस॰ तक
योग
वृद्धि 22:18 तक
ध्रुव 20:06, 9 दिस॰ तक
करण
गर 12:11 तक
वणिज 23:19 तक
विष्टि (भद्रा) 10:38, 9 दिस॰ तक
चंद्र राशि
धनु 15:18 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
09:07
चंद्रास्त
20:11
दिनमान
10h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:48
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
09:20 – 10:39
यमगंड
13:16 – 14:35
गुलिक काल
06:42 – 08:01

8 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:42 – 08:01टालें
शुभ08:01 – 09:20शुभ
रोग09:20 – 10:39टालें
उद्वेग10:39 – 11:58टालें
चर11:58 – 13:16सामान्य
लाभ13:16 – 14:35शुभ
अमृत14:35 – 15:54शुभ
काल15:54 – 17:13टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:13 – 18:54शुभ
उद्वेग18:54 – 20:35टालें
शुभ20:35 – 22:17शुभ
अमृत22:17 – 23:58शुभ
चर23:58 – 01:39सामान्य
रोग01:39 – 03:20टालें
काल03:20 – 05:02टालें
लाभ05:02 – 06:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4207:35दिन
गुरु07:3508:27दिन
मंगल08:2709:20दिन
सूर्य09:2010:12दिन
शुक्र10:1211:05दिन
बुध11:0511:58दिन
चंद्र11:5812:50दिन
शनि12:5013:43दिन
गुरु13:4314:35दिन
मंगल14:3515:28दिन
सूर्य15:2816:20दिन
शुक्र16:2017:13दिन
बुध17:1318:20रात
चंद्र18:2019:28रात
शनि19:2820:35रात
गुरु20:3521:43रात
मंगल21:4322:50रात
सूर्य22:5023:58रात
शुक्र23:5801:05रात
बुध01:0502:13रात
चंद्र02:1303:20रात
शनि03:2004:28रात
गुरु04:2805:35रात
मंगल05:3506:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2752° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।