21 दिसंबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (05:36, 22 दिस॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (07:24 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:50 पर और सूर्यास्त 17:17 पर है। राहुकाल 10:45 से 12:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:50 – 17:17
रात 06:51 तक
तिथि
प्रतिपदा, 05:36 तक
नक्षत्र
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 05:36, 22 दिस॰ तक
कृष्ण द्वितीया 06:30, 23 दिस॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 09:11, 22 दिस॰ तक
योग
शुक्ल 21:59 तक
ब्रह्म 21:37, 22 दिस॰ तक
करण
बालव 16:59 तक
कौलव 05:36, 22 दिस॰ तक
तैतिल 18:06, 22 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
17:17
चंद्रोदय
17:44
चंद्रास्त
06:58
दिनमान
10h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:56
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
10:45 – 12:04
यमगंड
14:41 – 15:59
गुलिक काल
08:09 – 09:27

21 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:50 – 08:09सामान्य
लाभ08:09 – 09:27शुभ
अमृत09:27 – 10:45शुभ
काल10:45 – 12:04टालें
शुभ12:04 – 13:22शुभ
रोग13:22 – 14:41टालें
उद्वेग14:41 – 15:59टालें
चर15:59 – 17:17सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:17 – 18:59टालें
काल18:59 – 20:41टालें
लाभ20:41 – 22:22शुभ
उद्वेग22:22 – 00:04टालें
शुभ00:04 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:27शुभ
चर03:27 – 05:09सामान्य
रोग05:09 – 06:51टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5007:42दिन
बुध07:4208:35दिन
चंद्र08:3509:27दिन
शनि09:2710:19दिन
गुरु10:1911:12दिन
मंगल11:1212:04दिन
सूर्य12:0412:56दिन
शुक्र12:5613:48दिन
बुध13:4814:41दिन
चंद्र14:4115:33दिन
शनि15:3316:25दिन
गुरु16:2517:17दिन
मंगल17:1718:25रात
सूर्य18:2519:33रात
शुक्र19:3320:41रात
बुध20:4121:48रात
चंद्र21:4822:56रात
शनि22:5600:04रात
गुरु00:0401:12रात
मंगल01:1202:20रात
सूर्य02:2003:27रात
शुक्र03:2704:35रात
बुध04:3505:43रात
चंद्र05:4306:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2757° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।