2 जनवरी 2030 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 2 जनवरी 2030, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 2 जनवरी 2030 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:34 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (23:58 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 12:10 से 13:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 17:25
रात 06:55 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:34 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 23:58 तक
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 जनवरी 2030 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:34 तक
कृष्ण चतुर्दशी 10:50, 3 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 22:01, 3 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 16:36 तक
वृद्धि 13:09, 3 जन॰ तक
करण
वणिज 13:34 तक
विष्टि (भद्रा) 00:11, 3 जन॰ तक
शकुनि 10:50, 3 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
04:55
चंद्रास्त
15:38
दिनमान
10h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 06:01
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:31 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:10 – 13:28
यमगंड
08:14 – 09:32
गुलिक काल
10:51 – 12:10

2 जनवरी 2030 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:55 – 08:14शुभ
अमृत08:14 – 09:32शुभ
काल09:32 – 10:51टालें
शुभ10:51 – 12:10शुभ
रोग12:10 – 13:28टालें
उद्वेग13:28 – 14:47टालें
चर14:47 – 16:06सामान्य
लाभ16:06 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:25 – 19:06टालें
शुभ19:06 – 20:47शुभ
अमृत20:47 – 22:29शुभ
चर22:29 – 00:10सामान्य
रोग00:10 – 01:51टालें
काल01:51 – 03:32टालें
लाभ03:32 – 05:14शुभ
उद्वेग05:14 – 06:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5507:47दिन
चंद्र07:4708:40दिन
शनि08:4009:32दिन
गुरु09:3210:25दिन
मंगल10:2511:17दिन
सूर्य11:1712:10दिन
शुक्र12:1013:02दिन
बुध13:0213:55दिन
चंद्र13:5514:47दिन
शनि14:4715:40दिन
गुरु15:4016:32दिन
मंगल16:3217:25दिन
सूर्य17:2518:32रात
शुक्र18:3219:40रात
बुध19:4020:47रात
चंद्र20:4721:55रात
शनि21:5523:02रात
गुरु23:0200:10रात
मंगल00:1001:17रात
सूर्य01:1702:25रात
शुक्र02:2503:32रात
बुध03:3204:40रात
चंद्र04:4005:48रात
शनि05:4806:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2030विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2030मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2030शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जन॰ 2030प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2030पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2030संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जन॰ 2030कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जन॰ 2030कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2762° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।