5 जनवरी 2025 को मेलबर्न का पंचांग

रविवार, 5 जनवरी 2025, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

रविवार, 5 जनवरी 2025 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (01:45, 6 जन॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (01:48, 6 जन॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 20:45 पर है। राहुकाल 18:55 से 20:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 20:45
रात 06:05 तक
तिथि
षष्ठी, 01:45 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 01:48 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 01:45, 6 जन॰ तक
शुक्ल सप्तमी 23:54, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
योग
व्यतीपातअशुभ 13:02 तक
वरीयान 10:20, 6 जन॰ तक
करण
कौलव 14:39 तक
तैतिल 01:45, 6 जन॰ तक
गर 12:50, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 20:05 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
20:45
चंद्रोदय
11:27
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
14h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:27
अभिजीत मुहूर्त
12:55 – 13:54

अशुभ समय

राहुकाल
18:55 – 20:45
यमगंड
13:25 – 15:15
गुलिक काल
17:05 – 18:55

5 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:04 – 07:55टालें
चर07:55 – 09:45सामान्य
लाभ09:45 – 11:35शुभ
अमृत11:35 – 13:25शुभ
काल13:25 – 15:15टालें
शुभ15:15 – 17:05शुभ
रोग17:05 – 18:55टालें
उद्वेग18:55 – 20:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ20:45 – 21:55शुभ
अमृत21:55 – 23:05शुभ
चर23:05 – 00:15सामान्य
रोग00:15 – 01:25टालें
काल01:25 – 02:35टालें
लाभ02:35 – 03:45शुभ
उद्वेग03:45 – 04:55टालें
शुभ04:55 – 06:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0407:18दिन
शुक्र07:1808:31दिन
बुध08:3109:45दिन
चंद्र09:4510:58दिन
शनि10:5812:11दिन
गुरु12:1113:25दिन
मंगल13:2514:38दिन
सूर्य14:3815:52दिन
शुक्र15:5217:05दिन
बुध17:0518:18दिन
चंद्र18:1819:32दिन
शनि19:3220:45दिन
गुरु20:4521:32रात
मंगल21:3222:19रात
सूर्य22:1923:05रात
शुक्र23:0523:52रात
बुध23:5200:39रात
चंद्र00:3901:25रात
शनि01:2502:12रात
गुरु02:1202:59रात
मंगल02:5903:45रात
सूर्य03:4504:32रात
शुक्र04:3205:19रात
बुध05:1906:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2064° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।