31 जनवरी 2026 को मेलबर्न का पंचांग

शनिवार, 31 जनवरी 2026, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

शनिवार, 31 जनवरी 2026 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (13:56 तक), नक्षत्र आर्द्रा (08:57 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 20:34 पर है। राहुकाल 10:02 से 11:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 20:34
रात 06:33 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:56 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पुनर्वसु
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जनवरी 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 13:56 तक
शुक्ल चतुर्दशी 11:23, 1 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 07:04, 1 फ़र॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 19:03 तक
प्रीति 15:48, 1 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 13:56 तक
गर 00:37, 1 फ़र॰ तक
वणिज 11:23, 1 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 01:31, 1 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
20:34
चंद्रोदय
19:38
चंद्रास्त
03:54
दिनमान
14h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:12 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
13:05 – 14:01

अशुभ समय

राहुकाल
10:02 – 11:47
यमगंड
15:18 – 17:03
गुलिक काल
06:32 – 08:17

31 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:32 – 08:17टालें
शुभ08:17 – 10:02शुभ
रोग10:02 – 11:47टालें
उद्वेग11:47 – 13:33टालें
चर13:33 – 15:18सामान्य
लाभ15:18 – 17:03शुभ
अमृत17:03 – 18:48शुभ
काल18:48 – 20:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ20:34 – 21:49शुभ
उद्वेग21:49 – 23:03टालें
शुभ23:03 – 00:18शुभ
अमृत00:18 – 01:33शुभ
चर01:33 – 02:48सामान्य
रोग02:48 – 04:03टालें
काल04:03 – 05:18टालें
लाभ05:18 – 06:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3207:42दिन
गुरु07:4208:52दिन
मंगल08:5210:02दिन
सूर्य10:0211:12दिन
शुक्र11:1212:23दिन
बुध12:2313:33दिन
चंद्र13:3314:43दिन
शनि14:4315:53दिन
गुरु15:5317:03दिन
मंगल17:0318:13दिन
सूर्य18:1319:24दिन
शुक्र19:2420:34दिन
बुध20:3421:24रात
चंद्र21:2422:14रात
शनि22:1423:03रात
गुरु23:0323:53रात
मंगल23:5300:43रात
सूर्य00:4301:33रात
शुक्र01:3302:23रात
बुध02:2303:13रात
चंद्र03:1304:03रात
शनि04:0304:53रात
गुरु04:5305:43रात
मंगल05:4306:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2214° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।