31 मार्च 2026 को मेलबर्न का पंचांग

मंगलवार, 31 मार्च 2026, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Melbourne में है।

मंगलवार, 31 मार्च 2026 को मेलबर्न में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (12:26 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (20:51 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 07:32 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 16:19 से 17:47 तक है।

दिन और रात
दिन 07:32 – 19:15
रात 07:33 तक
तिथि
त्रयोदशी, 12:26 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 20:51 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 मार्च 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 12:26 तक
शुक्ल चतुर्दशी 12:36, 1 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 21:47, 1 अप्रैल तक
योग
गंडअशुभ 21:11 तक
वृद्धि 20:20, 1 अप्रैल तक
करण
तैतिल 12:26 तक
गर 00:28, 1 अप्रैल तक
वणिज 12:36, 1 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सिंह 03:02, 1 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:32
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
18:16
चंद्रास्त
05:21
दिनमान
11h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:54 – 06:43
अभिजीत मुहूर्त
13:00 – 13:47

अशुभ समय

राहुकाल
16:19 – 17:47
यमगंड
10:28 – 11:56
गुलिक काल
13:24 – 14:51

31 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:32 – 09:00टालें
उद्वेग09:00 – 10:28टालें
चर10:28 – 11:56सामान्य
लाभ11:56 – 13:24शुभ
अमृत13:24 – 14:51शुभ
काल14:51 – 16:19टालें
शुभ16:19 – 17:47शुभ
रोग17:47 – 19:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:15 – 20:47टालें
लाभ20:47 – 22:20शुभ
उद्वेग22:20 – 23:52टालें
शुभ23:52 – 01:24शुभ
अमृत01:24 – 02:56शुभ
चर02:56 – 04:29सामान्य
रोग04:29 – 06:01टालें
काल06:01 – 07:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:3208:31दिन
सूर्य08:3109:29दिन
शुक्र09:2910:28दिन
बुध10:2811:26दिन
चंद्र11:2612:25दिन
शनि12:2513:24दिन
गुरु13:2414:22दिन
मंगल14:2215:21दिन
सूर्य15:2116:19दिन
शुक्र16:1917:18दिन
बुध17:1818:16दिन
चंद्र18:1619:15दिन
शनि19:1520:16रात
गुरु20:1621:18रात
मंगल21:1822:20रात
सूर्य22:2023:21रात
शुक्र23:2100:23रात
बुध00:2301:24रात
चंद्र01:2402:26रात
शनि02:2603:27रात
गुरु03:2704:29रात
मंगल04:2905:30रात
सूर्य05:3006:32रात
शुक्र06:3207:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
21 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां मेलबर्न में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2237° (लाहिड़ी)। समय मेलबर्न (Australia/Melbourne) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।